नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्‍व ही बदल सकता है देश की तस्‍वीर

Narendra Modi
अतानु डे

बिना किसी पक्षपात के अगर भारत पर नजर डालें तो आप यह मानेंगे कि भारत हर मामले में विकासशील देश है। सबसे खराब यह है कि भारत हमेशा से अच्‍छा करने में सक्षम रहा है, फिर भी पीछे है। विकसित देशों में शामिल होने में अभी तक सफलता नहीं मिलने का कारण यहां पर अच्‍छे नेतृत्‍व का अभाव है। बाकी भारत में किसी चीज की कमी नहीं है। विकास के लिए जरूरी सामाजिक, सांस्‍कृतिक तत्‍व सभी हैं, फिर भी अपने मकसद तक नहीं पहुंच पाया है, जबकि यह काफी आसान है।

दशकों तक भारत बार-बार परिवर्तन की ऊंचाईयों तक पहुंचा लेकिन हर बार फिसल गया। एक बल है, जिससे भागा नहीं जा सकता है, वो है विकास के लिए राजनीति इच्‍छाशक्ति, जिसका यहां अभाव है।

आर्थिक वृद्धि और विकास सिर्फ अर्थशास्‍त्र का पाठ नहीं है। अर्थशास्‍त्र आर्थिक समृद्धि के हर सवालों के जवाब देता है- जो विकास की नींव मजबूत करने के लिए जरूरी है- लेकिन इसके अकेले से अच्‍छे परिणाम नहीं हासिल हो सकते। सफलता मिलती है रास्‍ता बनाने से। रास्‍ते आपको मंजिल तक पहुंचा सकते हैं, लेकिन मंजिल निर्भर करती है लक्ष्‍य और यात्री पर।

देश के नेताओं के लक्ष्‍य उनकी नीतियों पर जिन्‍हें वो ग्रहण करते हैं। राजनीतिक इच्‍छाशक्ति मार्ग दिखाने वाली वो रौशनी है, जो सफलता और असफलता के मार्ग को रौशन करता है। भारत की असफलता के सीधे कारण हैं अदूरदर्शिता, खुद के लिए काम करना, नासमझी, बिना प्रेरणा के काम करना और ऐसे नेता जो प्रेरणाप्रद नहीं हैं और यह हमारा दुर्भाग्‍य है।

शायद देश को ऐसे नेता की जरूरत है। किसी भी जटिल प्रणाली जैसे भारी-भरकम आर्थिक स्थिति, कार्योत्‍पादन और फीडबैक का चक्र की वजह से कई कारक हैं, जो प्रणाली के अंदर दृढ़ हैं। एक समृद्ध समाज जो ईमानदारी से अपना नेता चुनता है, जिसके बदले में वो और ज्‍यादा समृद्धि देता है, और उसी की वजह से ईमानदार नेता ऊपर उठते हैं।

देश गरीबी और खराब नेताओं के अनैतिक चक्रों के बीच फंस सकता है, या प्रबुद्ध नेताओं के पवित्र चक्र के माध्‍यम से ऊपर उठ सकता है और आर्थिक रूप से समृ‍द्ध हो सकता है। ऐसा बहुत कम होता है लेकिन सबसे हटकर काम करने वाले नेताओं के राज में ऐसा संभव है। शायद नेतृत्‍व में परिवर्तन होता है, क्‍योंकि नहीं दिखने वाले अंदरूनी परिवर्तन एक साथ लोगों के दिमाग पर छा हाते हैं।

एक वृद्ध भारतीय ने कहा कि जब छात्र तैयार होता है, शिक्षक दिखाई देता है तब उन्‍हें वैसे ही छोड़ देना चा‍ि हये। वे सामूहिक प्रयास से भारत को सामूहिक रूप से बदल सकते हैं। प्रत्‍यकक्ष रूप से ऐसा बहुत कम ही होता है, लेकिन यह तीव्रता से बढ़ती है।

वो यह है: लोग सोचते हैं कि भारत में समर्पित नेताओं की कमी है, जो देश की चिंता करते हों, न कि देश के भविष्‍य को दांव पर लगाकर अपने संपन्‍नीकरण के बारे में। हालांकि परिवर्तन उनके लिए हमेशा खतरा है, जो अपने स्‍टेटस में खोये हुए हैं। गुलामी की कड़ियों कोने पर हैं और वहां की हवा में स्‍वतंत्रता की खुश्‍बू आ रही है, प्रगति के लिए बल देता है और पिछड़ेपन और गरीबी से ऊपर उठाती है।

वास्‍तव में ऐसे लोग हैं जिन्‍होंने देश की गरीबी और आर्थिक विफलता से ऊपर उठाने के प्रयास किये। जिसने भारत की प्रगति के लिए अपने निजी स्‍वार्थ को किनारे रख दिया और परिवर्तन लाये।

यह सभी बातें आपको नरेंद्र मोदी में मिल जायेंगी। करीब दस साल पहले, गुजरात पिछड़ा हुआ था और नरेंद्र भाई राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बने। उनके लिए आभार और सम्‍मान के साथ इन वर्षों में मैंने उनके नेतृत्‍व को करीब से देखा। आर्थिक विकास का छात्र होने के नाते मैंने पढ़ा कि विकास आर्थिक नीतियों का फलक है और आर्थिक नीतियां लक्ष्‍य से निकलती हैं और नेताओं के पास वो लक्ष्‍य होता है। इस आधार पर किसी भी नेता के बारे में आंकलन कर सकते हैं।

गुजरात में नरेंद्र भाई ने क्‍या हासिल किया यह बताने के लिए सर्वोत्‍तम उदाहरण है। उनके नेतृत्‍व में गुजरात के विकास की गाथाएं बहुत लिखी जा चुकी हैं। मैं दोबारा से नहीं बताउंगा। जिसका कोई मोल नहीं है वो उन्‍होंने बड़ी कठिनाई से हासिल किया। जितना उन्‍होंने हासिल किया उससे कहीं ज्‍यादा गुजरात को मिला। उन्‍होंने जितने सकारात्‍मक अभियान चलाये, उनके खिलाफ उतने ही निंदा के अभियान चलाये गये। कहते हैं कठिनाई में ही व्‍यक्ति का व्‍यक्तित्‍व पता चलता है। मोदी इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण है कि कैसे कठिनाईयों का सामना किया जाता है, और उन्‍हें सहजता, बुद्धिमता और देश के लिए समर्पित दृढ़ता के साथ कैसे कम किया जाता है।

उन्‍होंने अपने काम के बल पर अपने विरोधियों की ताकत को कम किया। जितना उन्‍होंने हासिल किया उतनी ही निंदा उन्‍हें मिली। यह निंदा वो लोग करते रहे, जो चाहते थे कि भारत और भारतीय हमेशा पिछड़े और गरीब बने रहें और उनके खिलाफ जानबूझ कर प्रहार करते रहे। कुछ भी कहें नरेंद्र मोदी की गुजरात में उपलब्धियों ने तमाम भारतीयों को जागृत किया है। अब वो भी समझते हैं कि परिवर्तन और विकास दोनों संभव हैं। वो कह रहे हैं, "अगर वो गुजरात के लिए कर सकते हैं, तो अब उस काम को वृहद स्‍तर पर पूरे भारत के लिए करने का समय है।" इससे नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में भारत के दुश्‍मनों के अंदर डर पैदा हो सकता है। यह समझने वाली बात है क्‍योंकि वो उनके कार्य अधूरे नहीं देख सकते। मुझे पक्‍का विश्‍वास है कि मोदी के खिलाफ लड़ाई और बढ़ेगी, लेकिन अंत में वही जीतेंगे, क्‍योंकि भारत को जीतना है।

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