जाट-मुसलमानों के गढ़ में सपा की उम्‍मीदें ज्‍यादा

Akhilesh Yadav
मुजफ्फरनगर। पूर्वांचल, मध्‍य और बुंदेलखंड होते हुए आखिरकार चुनाव एक्‍सप्रेस पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश पहुंच गई। इस एक्‍सप्रेस पर सवार सभी पार्टियों के लिए यहां सिर्फ कल का दिन और बचा है। उसके बाद चुनाव प्रचार का शोर थम जायेगा और फिर 28 फरवरी को वोट पड़ेंगे। यहां के वोटरों में दो लोग सबसे अहम होंगे- जाट और मुसलमान।

जाट और मुसलमानों के गढ़ में सबसे ज्‍यादा अगर जीत की उम्‍मीद है तो वो है समाजवादी पार्टी को। जबकि यहे राष्‍ट्रीय लोकदल का गढ़ माना जाता है। हालांकि बसपा प्रमुख मायावती और कांग्रेस के स्‍टार प्रचारक राहुल गांधी भी अपनी ताबड़-तोड़ रैलियों में जुटे हुए हैं। लेकिन अगर सपा की बात करें तो यहां उसके जीतने की उम्‍मीद के दो कारण हैं। पहला हाल ही में जामा मस्जित के उलेमा द्वारा सपा को खुला समर्थन और फिर शिया धर्मगुरु कल्‍बे जव्‍बाद द्वारा कांग्रेस की बुराई। अगर मुसलमानों ने उलेमा की बात मानी तब तो सपा के वोट पक्‍के हैं ही, और अगर कल्‍बे जव्‍बाद की बात मानी तो भी सपा को ही फायदा मिलेगा, क्‍योंकि कांग्रेस के साथ-साथ रालोद के भी वोट कट सकते हैं। वहीं मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा और बुलंदशहर में सपा की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है।

यहां के लोगों से पता चला है कि मुस्लिम मतदाता कांग्रेस-रालोद के प्रत्‍याशियों को सिर्फ उन्‍हीं सीटों पर वोट देंगे, जहां पर सपा के प्रत्‍याशी कमजोर हैं। अभी तक के समीकरण देखें तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बसपा के वोट कट सकते हैं। इसका कारण भठ्ठा पारसौल कांड है, जिसमें राहुल गांधी के हस्‍तक्षेप के कारण यहां कांग्रेस के प्रत्‍याशी जीत सकते हैं।

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