ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा कांग्रेस-रालोद का दोस्ताना

आपको बता दें कि इसके पूर्व भी जयंत चौधरी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किये जाने वाले मामले पर कांग्रेस अपनी तल्खें तेज कर चुकी है। इससे पहले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने जयंत सिंह की दावेदारी को सिरे से खारिज कर दिया था। गौरतलब हो कि जयंत के मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट किये जाने पर ही नहीं वरन कांग्रेस तो उनके चुनाव लड़ने तक के लिए असहमत थी लेकिन गल-बहियां कुछ तो करायेगी ही।
इसी बीच यह बातें भी सामने आने लगी कि कांग्रेस जयंत सिह को प्रोजेक्ट करने के लिए सहमत है, जिससे पानी सिर से उपर जाता देख दिग्विजय सिंह को आखिर खुलकर इस मामले को साफ करना पड़ा और उन्होने कहा कि, आखिर जो पार्टी प्रदेश में केवल 46 सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है उसे कैसे मुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। इसका साफ मतलब था कि वो अपनी मेहनत की मलाई को दूसरों में बाटनें को हर्गिज तैयार नहीं है।
वहीं अब कांग्रेस ने भी इस मामले को साफ करते हुए कह दिया है कि यदि चुनाव के बाद प्रदेश में सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री कांग्रेस का ही होगा। आपको बता दें कि इस मामले में पार्टी के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने भी कहा है कि कांग्रेस चुनाव से पहले अपने मुख्यमंत्री के बारें में कोई खुलासा नहीं करती है लेकिन यदि सरकार बनेगी तो मुख्यमंत्री पद हमेशा कांग्रेस के ही पास होगा।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अपने बयान से साफ कर दिया है कि चुनाव जीतने के बाद रालोद के जयंत चौधरी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं किया जायेगा। उन्होन बताया कि हम प्रदेश में चुनाव जीत रहें है यदि किसी वजह से हम पूर्ण बहुमत में नही आ पातें है तो न तो हम किसी को समर्थन देंगे और न ही किसी से लेंगे। अभी फिलहाल दोनों पक्षों में कुर्सी को लेकर खिंचतान जारी है, अब ये खिंचतान किस नतीजे पर पहुंचता है यह तो वक्त की मुठ्ठी में है। जानकारों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष के बीच ऐसे ही मामला चलता रहा तो इससे कांग्रेस-रालोद के दोस्ताने पर भी असर पड़ सकता है।












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