यूपी की रणभूमि में क्या जीत पायेंगे निर्दलीय प्रत्याशी?

एक समय ऐसा था जब 74 निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने दम पर जीत दर्ज प्रदेश की राजनीति में एक अजब ही इतिहास रच दिया था। लेकिन अब वो समय लौटना कठीन ही लग रहा है क्योंकि वो दौर कुछ अलग ही था जब जनता नेता के व्यवहार और छवी को देखकर अपना मत देती थी लेकिन अब प्रदेश की राजनीतिक में बड़े-बड़े दलों के सक्रिय हो जाने के कारण निर्दलीय उम्मीदवारों की राह कठीन नजर आ रही है।
यदि पिछले विधानसभा चुनाव पर गौर करें तो पिछली बार प्रदेश भर कुल 2582 निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी संग्राम में अपना दम दिखाने कूदे थे। लेकिन राजनीतिक दलों के सामने यह कुछ करतब न दिखा सके और बमुश्किल 9 योद्वाओं ने पिछले वार के विधानसभा में चुनाव में जीत दर्ज की थी। उन दिग्गजों में अजय राय, राम प्रकाश यादव, इमरान मसूद, विनोद कुमार, अशोक यादव, यशपाल सिंह रावत, रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, अखिलेश सिंह, और मुख्तार अंसारी ने जीत दर्ज की थी और विधानसभा पहुंचे थे।
लेकिन अब इन्ही सूरमाओं को इस बार के चुनावी समीकरण को देखकर खुद पर भी भरोसा नहीं रहा है। इनमें से कई उम्मीदवारों ने निर्दल की टोपी उतार फेका और पार्टियों की हाथ थाम ली है। आपको बता दें कि इस बार मुख्तार अंसारी ने कौमी एकता का हाथ थामा है। वहीं विधायक अजय राय, और विधायक इमरान मसूद ने किसी तरह कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इसके अलावा अशोक यादव ने जनता दल युनाइटेड से टिकट प्राप्त कर मैदान में है।
गौरतलब हो कि पिछले बार के चुनाव के मुकाबले इस बार निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां पिछली बार कुल 2582 निर्दल उम्मीदवार मैदान में थे तो वहीं इस बार महज 1780 उम्मीदवार ही बिना दल के चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा सके है। निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या में आई इस भारी गिरावट को देख कर यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि अब प्रदेश की राजनिती में कूदने वालों में खुद पर भरोसा कम हो गया है।
यदि पिछले चुनावों पर गौर करें तो सन 1989 से ही जनता के बीच राजनीतिक पार्टियों की सक्रियता बढ़नी शुरू हुई थी उसके बाद से लगातार इनमे बढ़ोत्तरी दर्ज की गई और हर बार विधानसभा में पहुंचने वाले विधायकों में से निर्दलीय विधायकों की संख्या कम होजी चली गई। यदि आंकडों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश की विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण वर्ष 1957 था जिस समय प्रदेश ही नहीं वरन पूरे देश की राजनीति का रूप ही बिलकुल अलग था। उस बार के चुनाव में कुल 74 निर्दल उम्मीदवारों ने अपनी लोकप्रियता के बूते विधानसभा तक अपनी राह बनाई थी।
उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए महत्वर्पूण वर्ष:
वर्ष विजयी निर्दल उम्मीदवारों की संख्या
1957 74
1962 31
1967 37
1985 30
1989 40












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