गरीबों को बर्दाश्‍त नहीं कर सकते हरियाणा के निजी स्‍कूल

Children
सिरसा/हिसार/फतेहाबाद। अमीर घरों के बच्‍चों को एडमीशन देकर भारी-भरकम फीस की जुगाड़ में रहने वाले निजी स्‍कूल अपने यहां गरीब बच्‍चों को बर्दाश्‍त नहीं कर सकते हैं। कहीं हो न हो ऐसा हरियाणा में जरूर है।

सरकार द्वारा 25 प्रतिशत बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के फैसले के विरोध में प्रदेश भर के निजी विद्यालय बंद रहे। विद्यालय बंद करके सभी स्कूल संचालक रोहतक में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में गए हैं ताकि सरकार पर दबाव डालकर इस आदेश को रद्द करवाया जा सके। हड़ताल को लेकर पिछले कई दिनों से स्कूल संचालक अभियान चलाए हुए थे। अभिभावकों का समर्थन हासिल करने के लिए भी स्कूल संचालकों ने अलग-अलग जिलों में रोष प्रदर्शन किया था। पूर्व निर्धारित तिथि के तहत ही आज विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया था।

स्कूल संचालकों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाना उनके लिए मुमकिन नहीं है क्योंकि कुछ विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम होती है। ऐसे में यदि 25 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी गई तो स्कूल का बजट बिगड़ जाएगा। इसके लिए अन्य बच्चों के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालना होगा जो व्यवहारिक नहीं है। उधर स्कूल संचालकों की इस मनमानी तथा शिक्षा के अधिकार का विरोध करने पर कुछ छात्र संगठन आंदोलन पर उतर आए हैं।

हरियाणा शिक्षा अधिनियम की धारा 134-ए को निरस्त करने अन्यथा सरकार की तरफ से प्राइवेट स्कूलों को भी आर्थिक सहायता देने की मांग अगर सरकार मार्च तक पूरा नहीं करती तो प्रदेश के सभी प्राइवेट स्कूल अप्रैल से जून तक स्कूलों को बंद रखेंगे। यह आह्वान आज प्रदेश के प्राइवेट स्कूल संचालकों ने रोहतक में प्रदेश स्तरीय विरोध प्रदर्शन में किया और अपनी मांगों का ज्ञापन रोहतक के जिला उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के पास भेजा। इस दौरान प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में छुट्टी रही।

हरियाणा संयुक्त स्कूल संघ के जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह ने बताया कि उनकी मुख्य मांग शिक्षा अधिनियम की धारा 134-ए को निरस्त करने के अलावा स्कूल बसों से कर हटाने और 3 जून 2011 से पहले के सभी प्राइवेट स्कूलों को शिक्षा का अधिकार नियम के तहत बिना औपचारिकताओं के स्थाई मान्यता दी जाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस धारा को इसी रूप में लागू करती है तो इससे स्कूल में पढऩे वाले सामान्य श्रेणी के बच्चों की फीस में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी, जिसका असर प्रत्यक्ष रूप से इन बच्चों के अभिभावकों की जेब पर पड़ेगा, जोकि वे किसी भी रूप में नहीं चाहते।

उन्होंने कहा कि वे किसी भी रूप में इस नियम के लागू होने से बढऩे वाले आर्थिक बोझ को अपने ऊपर नहीं लेगी। अगर सरकार इस नियम को लागू करना चाहती है तो वह प्राइवेट स्कूलों में पढऩे वाले ऐसे बच्चों के खर्च को स्कूल को रिम्बर्स कर दे। अगर उनकी इन मांगों को सरकार ने नहीं माना तो प्रदेश के सभी प्राइवेट स्कूल तीन महीने के लिए बंद रखेंगे।

उन्होंने कहा कि उनके इस विरोध का अप्रत्यक्ष रूप से बच्चों की शिक्षा पर जो असर होगा, उसकी जिम्मेवार सरकार होगी। इस अवसर पर हिसार जिले के प्राइवेट स्कूल संचालकों के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों में एसके नागपाल, संजय पठनेजा, गौरव, लोकेश, अनिल, तेलूराम, राजीव मिगलानी, रामफल कुंडू, कृष्ण शर्मा, जेपी पाहवा, सुरेन्द्र यादव, संजय धवन, शशी सहगल व अन्य लोग उपस्थित थे।

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