यूपी के पांचवें चरण की सीटवार समीक्षा

उत्‍तर प्रदेश के पहले चरण में 62 प्रतिशत मतदान के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों की नजरें अब दूसरे चरण पर टिकी हुई हैं। उम्‍मीद से अधिक वोट पड़ने से यह साफ हो गया है कि उत्‍तर प्रदेश में बदलाव की लहर चल पड़ी है। हालांकि पहले चरण में तो बारिश की वजह से तमाम मतदाता बाहर नहीं निकल सके, इसलिए सही आंकलन लगाना ठीक नहीं होगा।

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण का मतदान आज संपन्‍न हो गया। यहां पर कुल 49 सीटों के लिए उम्‍मीदवारों का भविष्‍य ईवीएम में बंद हुआ। देखा जाये तो पिछले सालों के मुताबिक इस साल यहां पर मतदान का प्रतिशत काफी बढ़ा है। लेकिन अगर हम पिछले चुनाव के पन्‍ने पलटें तो मतदाताओं का न‍जरिया साफ दिखाई देगा, जिसकी छवि इस साल भी दिखाई दे सकती है।

पांचवें चरण में बुंदेलखंड प्रमुख रहा, जहां राहुल गांधी ने इस साल सबसे ज्‍यादा मेहनत की है। भाजपा ने विशेष रूप से उमा भारती को मध्‍य प्रदेश से इम्‍पोर्ट किया और मायावती ने तमाम घोषणाएं कीं। अब देखना है कि यहां क्‍या होता है। खैर हम यहां बात करेंगे उन प्रत्‍येक सीट की, जिन पर आज मतदान हुआ है।

सीट वार समीक्षा इस प्रकार है-

95. टुंडला (अनुसूचित जाति) – यहां पर 40 मतदान तो आम बात है। 1993 में 50 फीसदी से ऊपर मतदान हुआ था। यह सीट भाजपा और सपा के खाते में जाती रही है, हालांकि 2009 के लोकसभा चुनावों में बसपा को बढ़त मिली थी।

96. जसराना – यहां पर 1993 में सबसे ज्‍यादा मतदान हुआ था। वैसे तो यह सपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन 2009 अखिलेश यादव को उम्‍मीद से कम वोट मिले थे, लिहाजा इस साल कुछ भी कहना जल्‍दबाजी होगा।

97. फिरोजाबाद –यहां पर सपा का गढ़ है, और 2009 में अखिलेश यादव को भारी संख्‍या में वोट मिले थे, लिहाजा इस बार भी सपा की जीत नजर आ रही है।

98. शिकोहाबाद– यह सीट भाजपा और सपा के हाथों में रही है। हालांकि पिछले कई वर्षों से सपा ने अच्‍छी पकड़ बना ली है, जिसके सकारात्‍मक परिणाम 2009 में दिखे भी थे।

99. सिरसागंज – इस नई सीट पर सपा की जीत दिखाई दे रही है।

100. कासगंज – भाजपा का कभी यहां वर्चस्‍व हुआ करता था, जिस पर बाद में सपा ने कब्‍जा कर लिया। हालां कि 2009 के आंकड़े देखें तो बिना किसी दल के चुनाव में खड़े हुए कल्‍याण सिंह को यहां से भारी संख्‍या में वोट मिले थे।

101. अमनपुर - इस नई सीट पर कल्‍याण सिंह की पार्टी के प्रत्‍याशी की जीत हो सकती है।

102. पटियाली – यहां पर भाजपा का गढ़ था, लेकिन बाद में सपा ने सीट पर कब्‍जा कर लिया और फिर बसपा ने। इस साल तीनों के बीच कड़ी टक्‍कर हो सकती है।

103. अलीगंज – यहां पर सपा का गढ़ है, लेकिन सलमान खुर्शीद ने कांग्रेस को मजबूती दी है। वहीं बसपा ने भी मजबूत पैठ बना ली है।

104. एटा – यहां सपा का गढ़ है, लेकिन 2009 के चुनाव में कल्‍याण सिंह को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिलने से मुलायम के पसीने छूट गये थे।

105. मरहरा – इस नई सीट पर सपा, बसपा और कांग्रेस की लड़ाई होगी।

106. जलेसर (अनुसूचित जाति) – यहां पहले भाजपा का गढ़ था, जिस पर बाद में सपा ने कब्‍जा कर लिया। आज भी यहां सपा की तूती बोलती है।

107. मैनपुरी। मुलायम सिंह के गढ़ में सपा के अलावा किसी की बात नहीं होती। हालांकि विधानसभा सीट पर पहले भाजपा का भी कब्‍जा रह चुका है।

108. भोगांव – यहां भी मुलायम का गढ़ है, औस सपा ने इस बार यहां बड़े-बड़े प्रयास किये हैं।

109. किश्‍नी(अनुसूचित जाति) – यहां पर सपा का वर्चस्‍व है और मुलायम को लोकसभा चुनाव में जीत के वक्‍त अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले थे।

110. करहल – यह सीट पहले सपा के पास थी, जिस पर भाजपा ने कब्‍जा किया, लेकिन 2009 के चुनावी आंकड़े एक बार फिर सपा के खाते में आने के संकेत दे रहे हैं।

199. जसवंतनगर- इस सीट पर शिवपाल सिंह यादव का दबदबा रहने की उम्‍मीद है।

200. इटावा – यहां वैसे तो सपा का गढ़ है, लेकिन भाजपा भी जीत चुकी है। लेकिन 2009 में बसपा को मिले सबसे ज्‍यादा वोटों ने दोनों पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है।

201. भरथाना (अनुसूचित जाति) – यहां सपा का गढ़ था, जिस पर अब कांग्रेस का कब्‍जा है। लेकिन बसपा ने यहां भी 2009 में अच्‍छा प्रदर्शन किया था।

202. बिधुना- समाजवादी पार्टी के गढ़ में बसपा ने पैर फैलाने शुरू कर दिये हैं, जो मुलायम के लिए चिंता का विषय है।

203. डिबियापुर – इस नई सीट पर सपा की ही लहर है।

204. औरैया (अनुसूचित जाति) – यहां पर कई प‍ार्टियों ने कब्‍जा जमाया लेकिन कोई विकास नहीं कर सका। अब सपा और बसपा की लड़ाई कड़ी हो सकती है।

205. रस्‍लाबाद (अनुसूचित जाति)- इस सीट पर अखिलेश यादव के प्रभाव से सपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिल सकते हैं।

206. अकबरपुर-रानिया- इस नई सीट पर सपा और बसपा की जंग होगी।

207. सिकंदरा- इस नई सीट पर सपा का बोलबाला है। अब देखना यह है कि बसपा उसे पछाड़ पायेगी या नहीं।

208. भोगनीपुर- यहां पर बसपा और सपा की फाइट है। लेकिन 2009 के आंकड़े सपा की ओर झुकाव दिखाते हैं।

209. बिलहौर (अनुसूचित जाति)- इस सीट पर 1993 में 60 फीसदी से ज्‍यादा मतदान हुआ था। यहां बसपा और सपा की कड़ी जंग होगी।

210. बिठूर- इस नई सीट पर कांग्रेस की लहर दिखाई दे रही है।

211. कल्‍याणपुर- इस सीट पर भाजपा का गढ़ है और 2009 में भी भाजपा को सबसे ज्‍यादा वोट मिले थे।

212. गोविंदनगर – यहां पहले कभी भाजपा का गढ़ हुआ करता था, लेकिन बाद में कांग्रेस ने कब्‍जा कर लिया। इस साल भाजपा यहां वापसी की पुरजोर कोशिश कर रही है।

213. सीसामऊ – यहां भी गोविंदनगर जैसा ही हाल है। श्रीप्रकाश जायसवाल के गढ़ में कांग्रेस के आगे दूसरों का आना मुश्किल है।

214. आर्यनगर- यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्‍कर हो सकती है। ऐसी ही टक्‍कर 2009 के लोकसभा चुनाव में भी दिखी थी।

215. किदवईनगर– इस नई सीट पर वैसे तो भाजपा का गढ़ रहा है, लेकिन 2009 के वोट कांग्रेस की ओर इशारा कर रहे हैं।

216. कानपुर छावनी- इस सीट पर भाजपा का ही बोलबाला रहा है। कांग्रेस ने 2009 में बढ़त बनाकर भाजपा की नाक में दम कर दिया था।

217. महाराजपुर- इस नई सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्‍कर हो सकती है।

218. घाटमपुर (अनुसूचित जाति) - 2009 के आंकड़े तो कांग्रेस की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन भाजपा से कांटे की टक्‍कर तय है।

219. माधवगढ़- यह सीट भाजपा और बसपा के खाते में रही है, लेकिन अब सपा ने पैर फैला लिये हैं।

220. कल्पि- यहां पर भाजपा और बसपा की जंग होगी।

221. उरई (अनुसूचित जाति)- सपा के गढ़ में बसपा या भाजपा का कब्‍जा होता दिखाई दे रहा है। 2009 में बसपा को भारी मत मिले थे।

222. बबीना- यहां पर बसपा और सपा के बीच जंग हमेशो से होती रही है, लेकिन इस बार कांग्रेस भी बराबर से लड़ रही है।

223. झांसी नगर- इस सीट पर भाजपा का गढ़ रहा है, लेकिन 2009 में बसपा को अच्‍छी संख्‍या में वोट मिले, लिहाजा इस साल बसपा आगे आ सकती है।

224. मौरानीपुर (अनूसूचित जाति) – इस सीट पर भाजपा का कब्‍जा था, लेकिन बाद में कांग्रेस आ गई। लेकिन भाजपा ने फिर से इसे हासिल कर लिया। इस बार देखना है कि सीट भाजपा के पास रहती है या कांग्रेस के पास फिर से जाती है।

225 . गरौथा – इस सीट पर 60 प्रतिशत मतदान होता रहा है। पहले यह सीट बसपा के पास थी जो सपा के पास गई। लेकिन 2009 के आंकड़े एक बार फिर बसपा की ओर इशारा कर रहे हैं।

226. ललितपुर– पहले यहां 55 प्रतिशत मतदान होता रहा है, लेकिन इस साल 80 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट पड़े हैं। यानी कांग्रेस के लिख खतरे की घंटी बज गई है।

227. मेहरोनी (अनुसूचित जाति)- बुंदेलखंड की इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस का कब्‍जा रहा है। लेकिन इस साल बसपा भी पुरजोर कोशिश में है।

228. हमीरपुर- इस सीट पर बसपा कई बार जीत चुकी है, और 2009 में यहां सपा को सबसे ज्‍यादा वोट मिले थे, यानी इस बार सपा आ सकती है।

229. राथ (अनुसूचित जाति) – इस सीट पर बसपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्‍कर होने की संभावना है, लेकिन 2009 के आंकड़े कांग्रेस की दावेदारी को भी मजबूत करते हैं।

230. महोबा- इस सीट पर सपा कई बार जीत चुकी है। इस बार बसपा और कांग्रेस पुरजोर कोशिशें कर रही हैं।

231. चरखरी- इस सीट पर भाजपा, सपा और सबपा जीत दर्ज कर चुकी हैं। इस बार कांग्रेस के युवराज ने यहां जरूरत से ज्‍यादा रुचि दिखाई है, लिहाजा कड़ी टक्‍कर हो सकती है।

इस लेख में इनपुट ब्‍लॉग स्‍टम्‍प्‍ड ऑफ से लिये गये हैं।

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