आतंकियों से लोहा लेने वाले सिपाही अयोग्य होते हैं!

आतंकी जब मारा गया उस समय मुलायम सिंह की सरकार थी, जब प्रमोशन की सिफारिश खारिज हुई उस समय मायावती की सरकार थी। लश्करे ताइबा के आतंकी सालार जंग को मुठभेड़ में ढेर करने वाले उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स के सदस्यों को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बिना बारी के प्रमोशन देने का वादा किया था। लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें इसके लिए काबिल नहीं माना।
एसटीएफ की इस टीम में सब इंस्पेक्टर अजय कुमार चर्तुवदी, सत्येंद्र सिंह, बृज मोहन पाल, जावेद अख्तर अंसारी, अमर सिंह रघुवंशी, हेड कांस्टेबल राकेश त्यागी, गजेंद्र पाल सिंह और कमांडो गिरीश चंद्र तथा ओमपाल शामिल थे। इन लोगों ने 8 मार्च 2006 को लखनऊ के गुसाईगंज में लश्कर के आतंकी सालार जंग उर्फ डॉक्टर को मुठभेड़ में मारा था। जम्मू और कश्मीर में सक्रिय डॉक्टर की यूपी, मध्य प्रदेश और दिल्ली पुलिस को तलाश थी। मुठभेड़ में जम्मू कश्मीर पुलिस और यूपी एसटीएफ ने हिस्सा लिया था। यह घटना 2006 के वाराणसी धमाकों के कुछ घंटे बाद हुई थी।
मुठभेड़ के तत्काल बाद मुलायम सिंह यादव ने राज्य विधानसभा में एसटीएफ जांबाजों की सराहना करते हुए आउट आफ टर्न प्रमोशन की घोषणा की थी। ज्योतिबा फुले नगर के वकील सुरमित कुमार गुप्ता की आरटीआई अर्जी के जवाब में उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने बताया कि पुलिसकर्मियों की समय से पहले पदोन्नति नहीं की गयी। हालांकि उन्होंने माना कि इस संबंध में 2007 में सिफारिश मिली थी।जवाब के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने तय प्रक्रिया के अनुसार मुठभेड़ पर विचार विमर्श किया लेकिन बातचीत के बाद पुलिसकर्मी समयपूर्व पदोन्नति के योग्य नहीं पाये गये।












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