इस बजट में रेल किराया बढ़ने की पूरी संभावना

राजनीतिक कारणों से किराए नहीं बढ़ाए जा रहे। इस जिद से सबसे ज्यादा संरक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं रोजाना के प्रचालन के लिए रेलवे को पर्याप्त राशि नहीं मिल पा रही है। समिति के अनुसार रेलवे को व्यावसायिक ढंग से चलाए बिना अब काम नहीं चलेगा।
समिति ने कहा है कि रेलवे में परिसंपत्तियों के नवीनीकरण की ऐसी कोई प्रणाली नहीं है जो हकीकत पर आधारित हो। बस अनुमान से नवीनीकरण के कार्य होते हैं। इस मकसद से बनाई गई मूल्य ह्रास आरक्षित निधि में कितना धन डाला जाए इसका भी सही आकलन नहीं होता। पिछले तीन सालों से इस निधि में क्लोजिंग बैलेंस न के बराबर है। इसके बावजूद अलाभप्रद सेवाएं चलाना जारी है।
समिति का कहना है कि रेलवे की कमाई का 18 प्रतिशत सामाजिक सेवाओं पर खर्च होता है। इसके बावजूद लाभांश की अदायगी जरूरी बनी हुई है। माल भाड़े से यात्री किराए की भरपाई बंद होनी चाहिए। समिति ने हर साल नई ट्रेनों की घोषणा की प्रवृत्ति पर भी प्रहार किया है। समिति ने आगाह किया है कि बिना क्षमता बढ़ाए अब एक भी नई ट्रेन नहीं चलनी चाहिए। समिति ने वैगन और कोचों के रखरखाव के लिए कईकारखानों की स्थापना की सलाह दी है। इन्हें युद्धस्तर पर लगाया जाए। समिति ने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन के लिए अलग विशेषज्ञ समूह गठित करने का सुझाव भी दिया है।












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