मायावती जी- लखनऊ कहां से दिखता है पेरिस?
इंटरनेट की दुनिया में एक क्लिक पर देश दुनिया की तस्वीरें आप कहीं भी कभी भी प्राप्त कर कसते हैं। चाहे आप नोएडा या लखनऊ में बैठे हों, या फिर बाराबंकी के गांव अचकामऊ में। आज शहर और गांव का बच्चा-बच्चा तक जानता है कि वॉशिंगटन, बीजिंग और पेरिस दिखने में कैसे लगते हैं। वहां की व्यवस्था कैसी है। लेकिन इस बात का इल्म शायद मायावती को नहीं। सच पूछिए तो मायावती यूपी की जनता को बेवकूफ समझती हैं।
जी हां, अगर वो जनता को समझदार समझती होतीं तो गुरुवार को अपनी रैली के मंच से खड़े होकर यह नहीं कहतीं कि "लखनऊ अब पेरिस जैसा सुंदर लगने लगा है।" लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा, "हमने शहर में दलित नेताओं की मूर्तियां लगायी हैं, जो सपा तोड़ना चाहती है, जरा सोचिये इससे लखनऊ एक दम पेरिस जैसा हो गया है।"
मजेदार बात यह है कि जिस मोहनलाल गंज में खड़े होकर मायावती यह बात कह रही थीं, वह इलाका लखनऊ से भी पिछड़ा हुआ है। चलिये आउटर एरिये की बात नहीं करें तो भी पता नहीं कहां से मायावती को यहां पेरिस नजर आता है। शहर के सबसे पॉश इलाके हजरतगंज में सभी इमारतें ऑफ व्हाइट और बोर्ड काले रंग के कर दिये, लेकिन मुख्य सड़क से एक कदम भी अगर आप गली की ओर मुड़ेंगे तो सारी पोल खुल जायेगी। प्रेसक्लब से लेकर लालबाग के कई इलाकों में नलों में इतना गंदा पानी आता है कि बिना फिल्टर कोई पीले तो उसे जॉनडिस जैसी बीमारियां हो जायें।
हजरतगंज से गोमतीनगर की ओर बढ़ें तो इस रोड पर स्थित जियामऊ आज भी पिछड़ा हुआ है। यही नहीं गोमतीनगर के अंदर के कई इलाकों में आज भी सीवेज की समस्या है, जो हर बारिश में ऊभर कर सामने आती है। और तो और गोमती नदी के हाल तो इससे भी बुरे हैं। मैं मायावती से पूछा चाहूंगा कि क्या वो पेरिस गई हैं, अगर गई हैं, तो क्या उन्होंने गोमती नदी जैसी नदी वहां देखी है?
गोमतीनगर से बायें मुड़ें तो इंदिरानगर और फिर अलीगंज, जानकीपुरम और आगे बढ़ें तो त्रिवेणीनगर और खदरा आता है। इंदिरानगर और अलीगंज तो फिर भी गनीमत है, लेकिन त्रिवेणीनगर और खदरा में बारिश के दिनों में तमाम घरों में मेनहोल का पानी घुस जाता है। सड़कें वर्षों से जस के तस पड़ी हैं। इसके अलावा खदरा से आगे बढ़ते हुए चौक, नक्खास, राजाजीपुरम, आलमबाग और फिर कृष्णानगर। इन इलाकों का भी ऐसा ही हाल है।
मायावती ने अगर नये लखनऊ को पेरिस बना दिया है तो पुराने लखनऊ को अगर पेरिस का 10 प्रतिशत भी बना दिया होता तो यहां के लोग बिजली और पानी की मूलभूत समस्याओं से नहीं जूझते। आज भी चौक की गलियों में चिकनकारी करने वाले बुनकर मोमबत्तियों और मिट्टी की तेल की कुप्पियों में काम करते हैं। कुल मिलाकर देखा जाये तो मायावती का यह एक बयान सिर्फ और सिर्फ यूपी की जनता को बेवकूफ बनाने के सिवा कुछ नहीं।













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