सपा को मायावती के करीबी अधिकारियों पर शक
यह गिरावट चिन्ताजनक है और इसके पीछे गहरी साजिश होने का अंदेशा है। पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि विधानसभा चुनाव की शुरुआत से ही जनता ने बसपा के कुशासन के खिलाफ भारी जनाक्रोश और सपा के पक्ष में जनलहर चल रही है। कांग्रेस और भाजपा तीसरे-चौथे स्थान के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने कहा कि बसपा के अधिकारी जहां मतदान को प्रभावित करने में लगे हैं वहीं अपनी खोई हुई जमीन से परेशान कांग्रेस ने भ्रष्टाचार की नाव के साथ डूबने को तैयार बसपा से साठगांठ कर ली है।
इसमें बसपा के दलाल बन चुकी नौकरशाही भी शामिल हो गयी है। इनकी मंशा पिछड़ों और मुसलमानों के वोट पडऩे से रोकने की है क्योंकि इनमें कांग्रेस बसपा की दाल नहीं गल रही है। यह लोकतंत्र विरोधी आचरण है। चुनाव आयोग को इसका तुरन्त संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सपा ने पहले ही यह आशंका जतायी थी कि प्रदेश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के रास्ते में मुख्यमंत्री और उनके चहेते अफसरान हर तरह के अडंग़े लगायेंगे।
तमाम शिकायतों के बावजूद कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह, डीजी पीएसी बृजलाल, मुख्यमंत्री के सचिव फतेहबहादुर सिंह, डीआईजी डी के ठाकुर को उनके पदों पर बरकरार रखा गया है और ये अफसरान अभी भी पंचम तल से अधीनस्थ अधिकारियों पर बसपा के पक्ष में दबाव बना रहे हैं। यह अफसर समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने से भयभीत हैं इसलिए मतदान में अभी से गड़बड़ी करने लगे हैं।













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