भारत में पहली बार इस्तेमाल हुआ "स्टिक बम"

दिल्ली पुलिस के मुताबिक दोपहर तीन बजे के करीब जब इजराइली दूतावास की इनोवा कार जब सिगनल पर रुकी तब दो बाइक सवार आये और धीरे से कार के पीछे एक पैकेट चिपका दिया। असल में यही पैकेट स्टिक बम था। जानकारों के मुताबिक स्टिक बम में एक तीव्र चुम्बक लगा होता है। इसमें नाइट्रो ग्लीसरीन का प्रयोग किया जाता है, जो विस्फोटक पदार्थों में से एक है। हालांकि इसमें अमोनियम नाइट्रेट भी लगाया जा सकता है। इस बम को "स्टिक ग्रेनेड" भी कहते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बम का इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध में किया गया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 2010 में स्टिक बम का पता लगाने के लिए एक तकनीक भी निकाली, जिसमें वाहन की चुंबकीय फील्ड का पता लगा लेती है।
खास बात यह है कि आज अगर दिल्ली के हाई सिक्योरिटी जोन में आतंकी आसानी से घुस कर एक कार में स्टिक बम लगा सकते हैं, तो ये आतंकी ऐसी अन्य घटनाओं को भी अंजाम दे सकते हैं, वो भी इससे बड़ी। भारत में अब तक जितने भी बम ब्लास्ट हुए हैं उनमें सबसे ज्यादा प्रयोग टिफिन बम का किया गया है। मुंबई से लेकर अहमदाबाद और दिल्ली तक कई जगह टिफिन में बम प्लान्ड किये गये। जरा सोचिए वही टिफिन बम अगर स्टिक बम में परिवर्तित कर दिया जाये तो सड़कों पर दौड़ती मौत कितनों को निगल जायेगी।
इस खबर में हम सिर्फ महज इस बम के बारे में जानकारी ही नहीं देना चहाते हैं, बल्कि अगर भरी सड़क आपको कोई भी व्यक्ति किसी कार पर किसी भी वस्तु को चिपकाता नजर आये तो तुरंत 100 नंबर डायल करके उसकी जानकारी पुलिस को दें।
इससे पहले- प्रधानमंत्री आवास के पास कार में धमाका | इजराइली दूतावास ने कहा कार में हुआ आतंकी हमला












Click it and Unblock the Notifications