यूपी में छोटे-छोटे दलों की मदद से बनेगी त्रिशंकु विधानसभा

त्रिशंकु विधानसभा की अटकलों के बीच इन दलों का अपना जनाधार भले ही धरातल पर ज्यादा न हो। अकेले यह एक कौम या इलाके तक ही सीमित है। सत्ता में अपनी मजबूत दखल का दावा करते हुए इसके लिए इन दलों ने साझा मंच भी बनाये हैं। इन्हीं दलों ने इस बार चुनाव में इत्तेहाद मोर्चा बनाया है।
इनमें पीस पार्टी, अपना दल, उलमा कौंसिल समेत 19 दल शामिल हैं। पिछले लोकसभा चुनराव में 124 राजनीतिक दल मैदान में उतरे थे, इनमें से छह दलों को छोड़ दिया जाए तो किसी ने भी एक फीसदी वोट हासिल नहीं किया था। चालीस तो ऐसे छोटे दल हैं जिनका खाता भी नहीं खुल सका था। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी कुछ ऐसी ही कहानी बयां करते हैं।
इस चुनाव में 126 छोटे दलों ने उम्मीदवार उतारे थे। कुल मतदाताओं के लिहाज से देखें तो इनमें 74 दल ऐसे थे जिनके वोट का जिक्र कर पाना मुश्किल था। नतीजतन इन्हें शून्य फीसदी वोट पाया हुआ मानकर चुनाव आयोग ने अपने दस्तावेज पूरे कि अपना दल भी एक फीसदी वोट तक नहीं पहुंच पाया था।
जिस पूर्वांचल राज्य के नारे पर अमर सिंह अपने राजनीति चमकाने में जुटे हैं, उसकी मांग को लेकर चुनाव लडऩे वाले एक दल ने बीते चुनाव में केवल एक फीसदी वोट हथियाए थे। इन प्रदर्शनों के बावजूद इस बार विधानसभा चुनाव में एक बार फिर छोटे दलों ने अपनी मजबूत पकड़ का दावा किया है। इन दलों का कहना है कि विधानसभा चुनाव परिणाम ऐसे होंगे कि किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत नहीं मिलेगा। त्रिशंकु विधानसभा होगी, जोकि छोटे दलों के बिना नहीं बन सकेगी।
राजनीति जानकारों की मानें तो जिस प्रचार चुनाव आयोग स त है, उससे यह तय की आने वाले समय में छोटे दलों का अस्तित्व और भी घट सकता है। प्रचार व खर्चों पर जिस प्रकार आयोग नजर रख रहा है उससे तय ही आने वाले समय में इन उभरते दलों को अपनी पहचान के लिए विशेष प्रयास करने होंगे।












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