नरेंद्र मोदी के लिए राहत? फिर सोचिये...

Narendra Modi
जैसे ही आर. के. राघवन के नेतृत्व वाली एसआईटी द्वारा अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की खबर सुर्खियां बनीं, नरेंद्र मोदी के समर्थकों के बीच एक उत्‍साह दिखाई दिया। लेकिन गहराई में जाने पर साफ लगता है कि एसआईटी और श्री राघवन के पीछे कोई एक कुटिल इरादे हैं, जो उन्‍हें चला रहे हैं। इसे समझने में ज्‍यादा बुद्धि लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। नरेंद्र मोदी के प्रति 'नरम' होने की आड़ में, आर.के. राघवन हर संभव चरण पर पूरी कर्तव्‍यनिष्‍ठा के साथ कांग्रेस के मालिकों के आगे झुके हुए दिखाई देते हैं।

लाइनों के बीच पढ़ें और बिंदु मिल जायेंगे। श्री राघवन और उनकी टीम एक ही समूह था, जिसने गुजरात की महिला मंत्री को लक्ष्‍य बनाया, वो भी तब तक जब तक उन्‍होंने मंत्रालय छोड़ नहीं दिया और अंतत: उन्‍हें जेल हुई। वही कांग्रेस जो अब रोता हुआ भेड़िया है, इस कदम की जयजयकार कर रही है और पटाखे जला रही है।

कौन सा अन्वेषक स्वैच्छिक रूप से विपक्षी नेताओं के हाथों में उपहास की एक वस्तु बनने को तैयार है? यह ठीक वही है जो राघवन ने किया था, जब उन्‍होंने अर्जुन मोधवाडिया का खुला पत्र देखा था। उन्‍होंने खुद को गुजरात में विपक्ष के नेता के हुक्‍म मानने की इजाजत क्‍यों दी? जब संजीव भट्ट, तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार ने खलबली मचाने के उद्देश्‍य से उनसे संवाद करने के लिए उन्‍हें "दबाव की रणनीति" में लिप्‍त करने के लिए पूर्ण स्वतंत्रता ले ली तब यह स्‍पष्‍ट हो गया कि राघवन और यह तिकड़ी भारत के लोगों के साथ कांग्रेस के आदेश पर "छुपन-छुपाई" का खेल खेल रहे हैं।

जब यूपी में इतना महत्‍वपूर्ण चुनाव चल रहा था, तब ही क्‍यों श्री राघवन ने अपनी क्‍लोज़र रिपोर्ट सौंपी और कांग्रेस हताशापूर्ण ढंग से मुस्लिम वोटरों को रिझाया? 2002 के मुद्दे पर कोई भी निर्णय मुस्लिम मतदाताओं के बीच खलबली मचा देता है और इससे वो स्थिति आ सकती है, और यूपी में कांग्रेस की अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ स्थिति मजबूत हो सकती है. इस प्रकार, कांग्रेस के लिए रिपोर्ट को जारी करना और उसके कुछ चुनिंदा भागों को लीक कर के ऐसी स्थिति को पैदा करना सुविधाजनक, जहां मुसलमानों की बड़ी संख्‍या कांग्रेस की तरफ आकर्षित हो सकती है। बेवकूफ बनाने के इस तरीके को जल्‍द से जल्‍द पकड़ लेना चाहिये! यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि श्री राघवन इस स्वांग के लिए पार्टी बन गये है।

हर कदम पर राघवन समिति कांग्रेस के अंगूठे के नीचे है। और कैसे नरेंद्र मोदी से एसआईटी द्वारा 11 घंटे की अपमानजनक पूछताछ की व्‍याख्‍या की जा सकती है? सत्‍ता के ठोस समर्थन के बिना क्‍या किसी अन्‍य मुख्‍यमंत्री के साथ ऐसा अपमान किया जा सकता है? अगर कांग्रेस का हाथ नहीं होता तो क्‍या इस तरह की पूछाताछ संभव थी?

यह उच्च समय है, जागिये और कांग्रेस का दोहरा खेल देखिये। वोट के माध्‍यम से नरेंद्र मोदी को हराने में वे व्यापक रूप से विफल रहे हैं, इसलिए अब अदालतों का उपयोग कर वे अपना पुराना हिसाब चुक्‍ता करने में लगे हैं। संस्थागत विनाश, कांग्रेस के जीने का तरीका रहा है, और जो अब हो रहा है वो नया नहीं है। यह केवल दु:खदायी है कि सरकारी कर्मचारियों भी स्वेच्छा से कांग्रेस नेतृत्‍व की पसंद और सनक के अनुरूप इस संदिग्‍ध व्‍यक्तियों के इस खेल में जकड़ गये हैं। एसआईटी की क्‍लोजर रिपोर्ट अभी सिर्फ प्रस्‍तुत की गई है, जारी नहीं हुई है, लेकिन अगर फिर भी यह गुजरात सरकार के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश का फैसला करती है तो वास्‍तव में मुझे आश्‍चर्य नहीं होगा। मीडिया के मुताबिक एसआईटी नरेंद्र मोदी के प्रति दयालू है, लेकिन मुझे विश्‍वास नहीं होता....

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