मिले हुए हैं कांग्रेस, सपा और बसपा: गडकरी

हम उनसे जानना चाहेंगे कि जब उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता तो वे इस काम को कैसे करेंगे। गडकरी ने कहा कि पार्टियों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए चिह्नित आरक्षण को कम करने के बारे में सोच रहे हैं।
वहीं दलितों की सबसे बड़ी हिमायती होने का दावा करने वाली बसपा इस मुद्दे पर चुप है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि इन सभी दलों के हाथ आपस में मिले हुए हैं। गडकरी ने कहा कि धार्मिक आधार पर आरक्षण की बात करना जवाहर लाल नेहरू, मौलाना आजाद और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे राजनेताओं के उस रुख से मतभेद प्रकट करना होगा, जो उन्होंने संविधान सभा में चर्चा के दौरान रखा था।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि ये दल मुस्लिमों को आरक्षण की बात किसी यथार्थपूर्ण वजह से नहीं कर रहे बल्कि वे इस समुदाय को महज वोट बैंक मानते हैं। गडकरी ने कहा कि इन दलों के बीच सहमति केवल वोट बैंक की राजनीति तक सीमित नहीं है। भ्रष्टाचार पर जब इन पर निशाना साधा जाता है तो एक दूसरे की मदद करने लगते हैं।












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