2008 की मंदी के लिए बी-स्कूल जिम्मेदार नहीं: सौमित्र दत्ता

आपका करियर भारत में और भारतीय होने के नाते आपने कैसे तरक्की की- अनुभव हासिल किये और परिवर्तन देखे?
मेरे पिता डॉक्टर हैं, जिन्होंने अपना करियर भारतीय वायुसेना में व्यतीत किया और मेरी मां गृहणी थीं, जिन्होंने अपना जीवन परिवार के लिए न्योछावर कर दिया। वायुसेना के माहौल में मैं पला-बढ़ा और दिल्ली, जोरहाट और बेंगलुरु समेत देश के कई भागों में रहा - और इसी वजह से देश भर में मेरे मित्र हैं। इसीलिए मेरे डीएनए में विभिन्न संस्कृतियां हैं, जिन्होंने मुझे करियर में एक अंतर्राष्ट्रीय एकेडमीशियन बनने में मदद की साथ ही मदद की, विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों के साथ रहने व काम करने में। मेरी मां के प्रभाव से मैंने लोगों से संबंधों के महत्व को सीखा और आज मैं इसके लिए खुश हूं। और यह सभी चीजें नेतृत्व के लिए जरूरी भी हैं।
आप कई दशकों तक भारत से दूर रहे। अब आप भारत तक कैसे पुल बनायेंगे?
मैं हर दो-तीन महीने में भारत आता रहता हूं। मेरे माता-पिता और बहन दिल्ली में रहती है और देश में मेरे कई सारे मित्र हैं। मैं सीआईआई जैसे कई भारतीय संस्थानों और इंफोसिस जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुका हूं। मैं भारत से प्रेम करता हूं और एक भारतीय हूं। मैंने भारत को कभी नहीं छोड़ा।
यूरोप की तुलना में अमेरिका में पारंपरिक रूप से विदेशी टैलेंट (जैसे हारवर्ड, केलोग, चिकागो, और अब कर्नल बिजेन स्कूल में हो रहा है) का स्वागत होता है। यूरोप के बिजनेस क्षेत्र में उसे शीर्ष रैंक पर लाने पर आपको कैसा अनुभव हुआ था और अमेरिका में आपने उसका कैसे लाभ उठाया?
इनसीड एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय स्कूल है, और कई वैश्विक संस्थानों से भी। मुझे नहीं लगता कि इनसीड या यूरोप के अन्य संस्थान का कभी कम स्वागत हुआ हो। हालांकि जो सत्य है वो यह कि यूरोपीय सकूल वैश्विक स्तर पर शिक्षकों को आकर्षित करने में पीछे रह जाते हैं कई ऐसे हैं भी, इनसीड को छोड़ कर कई स्कूल ऐसे हैं, जिनकी सीमाएं हैं और वित्तीय पैकेज के आधार पर वैश्विक स्तर पर काम करते हैं। यह तस्वीर अब बदल रही है। कई यूरोपीय स्कूल अब अपने टैलेंट के बल पर वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। शिक्षक और छात्र दोनों।
कर्नल प्रेसिडेंट ने आपको अपने साथ जोड़ते समय इसे विश्वविद्यालय को वैश्विक तस्वीर के रूप में देखा। क्या आप उसे विस्तार से बता सकते हैं? इनसीड की विभिन्न शाखाओं की तरह क्या हम न्यू यॉर्क स्टेट के बाहर कर्नल को देखेंगे?
कर्नल एक वैश्विक विश्वविद्यालय है और कई देशों से उसके बड़े और भारत समेत प्रगाढ़ संपर्क हैं। इसीलिए जॉनसन स्कूल के डीन के पद के लिए अमेरिका की राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर देखने का कर्नल विश्वविद्यालय के निर्णय से स्पष्ट होता है कि भविष्य में वैश्विक स्तर हासिल करना शीर्ष विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता है। मेरा लक्ष्य जॉनसन को विश्वस्तर पर ले जाना और विश्व को जॉनसन तक विश्व को लेकर आने का है। यह कितना प्रभावी होगा यह चर्चा का विषय है, जो मैं शिक्षकों, स्टाफ और छात्रों के साथ आने वाले महीनों में करूंगा।
इनसीड के लिए एक्जिक्यूटिव एजूकेशन चलाने के आपके अनुभव के साथ, क्या कर्नल कॉर्पोरेट यूरोप तक पहुंचने की सोच रहा है? यूरोप की आर्थिक स्थिति को देखते हुए क्या इस पहल के लिए यह समय ठीक नहीं होगा?
कर्नल का मुख्य लक्ष्य यूरोप और अन्य उभरते हुए बाजारों की ओर है। लेकिन व्यापार अब वैश्विक हो गया है। कोई भी गंभीर कंपनी सिर्फ राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर पर व्यापार करने की नहीं सोचती। यूरोजोन में आर्थिक मंदी जैसी मंदी क्षणिक हैं। यह लंबे समय तक बाजार पर प्रभाव नहीं डालेंगी। खास तौर पर बिजनेस एजूकेशन और मैनेजमेंट डेवलपमेंट में तो कतई नहीं।
आर्थिक मंदी की बात करें तो 2008 में सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूलों के छात्र भी इस मंदी की चपेट में आ गये थे। हम एमबीए पाठ्यक्रमों को कैसे तैयार करें, कि 2008 की पुनरावृत्ति नहीं हो?
2008 की आर्थिक मंदी के लिए बिजनेस स्कूलों पर आरोपगढ़ना गलत होगा। एमबीए डिग्री धारकों में से बहुत थोड़े से लोग ही इससे प्रभावित हुए थे। हालांकि यह सवाल पूछा एकदम सही है, कि आर्थिक मंदी ने शिक्षा पर क्या प्रभाव डाला था और एमबीए पाठ्यक्रमों में हमें क्या परिवर्तन करने चाहिये। हालांकि इसके लिए कोई रामबाण तो नहीं हैं, लेकिन हम इसके बारे में सोच जरूर सकते हैं और महत्वपूर्ण कदम भी उठा सकते हैं उनमें हैं 1) व्यापार जगत के व्यापक दृष्टिकोण को समझना होगा जिसमें सरकार और समाज को शामिल करते हुए एक स्तर तैयार करना होगा। 2) सिर्फ मॉडल और उनके सॉल्यूशन पर फोकस करने के बजाये उनके जोखिम और सीमाओं की बात करनी होगी - जब मॉडल या आपके अनुमान फेल हो जायें तो उनसे सीखने के प्रयास करें; 3) एथिकल लीडरशिप के मूल्यों को मजबूत करें, ताकि वह सभी के लिए अच्छा करने के बल के रूप में आगे बढ़े।
किस तरह ऑनलाइन दुनिया ने काम और जीवन में परिवर्तन किये, इस पर आपने काफी काम किया है। क्या कर्नल आपके माध्यम से उन सभी को शिक्षा के आयामों में परिवर्तन लाने की तैयारी में है?
तकनीक हमारे आस-पास की दुनिया को बदल रही है और इसने सीखने के स्तर पर और शिक्षा में नये बिजनेस मॉडल शुरू करने चाहिये। कर्नल के पास कंप्यूटर और सूचना विज्ञान में काफी अच्छी तकनीकियां हैं और मैं उनके साथ मिलकर ऐसे तरीके खोजूंगा, जिसमें जॉनसन स्कूल के रिसर्च एवं अन्य कार्यक्रमों में तकनीकियों का बेहतर लाभ उठाया जा सके।
मैनेजमेंट की सोच और कामकाज पर प्रभाव डालने के लिए आपका अगला बड़ा बिजनेस आईडिया क्या है?
आज बिजनेस अच्छे के लिए एक बल बन गया है- सिर्फ लोगों की क्षमता ही नहीं बल्कि पूंजीवादियों की भी सेवा करता है। छोटी छोटी सेवाओं के साथ बिजनेस को अपनी दृष्टि को व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि वो प्रभावी वैश्विक नागरिक बन सकें। अगली बिजनेस थियोरी इस सोच को प्रभावी प्रबंध में व्यापक बनाने के लिए होगी, जिसमें बिजनेस का प्रदर्शन लंबे समय तक रहने वाली बढ़त के साथ मिल जायेंगे।
"शीर्ष स्तर पर कुछ नया करने पर आपने एक किताब लिखी है। अब आप शीर्ष पर हैं, आपके पास हमारे लिए करने के लिए क्या नया है?"
लीडरशिप एक सेवा पद होता है और इसीलिए मैं खुद को शीर्ष पर नहीं देखता। हां मुझे स्कूल का डीन बनाया गया है, तो मेरी प्राथमिकता होगी हिस्सेदारों और शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों को सुनने की होगी। उनकी सोच का मिश्रण तैयार कर एक कॉमन एजेंडा तैयार करेंगे और उनके आईडिया को लागू करेंगे। मुझे विश्वास है कि कर्नल और जॉनसन स्कूल कई तरीके से नया करने के प्रयास करेंगे, लेकिन मैं उन्हें आगे बढ़ाने का और उभरते हुए बाजार, तकनीकि, उद्यमिता और लंबे समय तक रहने वाल विकास के लिए दिशा-निर्देशन का काम करता रहूंगा।












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