61 साल में 14 से हो गये 143 दल मगर नहीं बढ़ा मतदान

लखनऊ। इसे राजनीतिक चेतना कहें या सियासी रुतबा हासिल करने की होड़। आज उत्तर प्रदेश में आज 143 राजनीतिक पार्टियां हैं, जबकि 1951 में यह संख्या महज 14 थी। सोचने वाली बात तो ये है कि पार्टियां तो लगातार बढ़ती गईं मगर मतदान प्रतिशत नहीं बढ़ा। 1951 से अब तक इसमें मामूली सा ही अंतर आया है। राजनीति करने वालों की संख्या तो बढ़ गई है, लेकिन जनता में मतदान के प्रति उत्साह ज्यों का त्यों रह गया।

प्रदेश में एक बार फिर विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। तमाम राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने एजेंडे के साथ मैदान में हैं। यूपी के साथ पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर में भी विस चुनाव होना है। इन राज्यों को मिलाकर राजनीतिक दलों की संख्या 101 है, जबकि अकेले उत्तर प्रदेश में अब तक 143 राजनीतिक दल चुनावी समर में कूद चुके हैं।

पिछले 62 वर्षों के बाद प्रदेश में राजनीतिक दलों की संख्या बढ़कर 10 गुना हो गई। पर मतदान की बात करें तो 1962 में विधानसभा चुनाव में 51 प्रतिशत के लगभग मतदान हुआ था, जबकि 2007 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 45 प्रतिशत मतदान हुआ। हैरत की बात है कि आम जनता की भागीदारी की किसी भी दल को चिंता नहीं है।

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