हरियाणा में राईट टू सर्विस आयोग के गठन की तैयारी

Right to a Service Commission in Haryana
चंडीगढ़। हरियाणा में शासन चला रही कांग्रेस पर सरकारी तंत्र इस कद्र हावी है कि कांग्रेसी दिग्गज पिछले सात वर्ष से 'लालबत्ती वाली गाड़ी' को तरस रहे है, जबकि अफसरशाही रिटायरमैंट लेने उपरांत भी 'लालबत्ती वाली गाड़ी' लिए जा रहे है। राज्य के सीआईडी मुखिया पी वी राठी की सेवानिवृत्ति के अगले दिन ही प्रधान सलाहकार(गृह) की नियुक्ति पा गए। प्रधान सलाहकार मुख्यमंत्री की तरह से गृह विभाग और सीआईडी की फाईलें देंखेगें।

मार्च मास में मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी रिटायर होने जा रही है तथा उन्हें सरकार में बनाए रखने के लिए राईट टू सर्विस आयोग के गठन की तैयारी शुरू कर दी गई है। संकेत मिल रहे है कि उर्वशी गुलाटी ही इस आयोग की मुख्य आयुक्त बनेगी। राईट टू सर्विस ऐक्ट(आर टी एस) के गठन की स्वीकृति हरियाणा विधानसभा से ली जाती है।

यदि किन्ही कारणों के चलते आयोग गठन की सहमति नहीं बनती, तो उन्हें सूचना आयोग के पद पर नवाजा जा सकता है। इससे पहले रिटायरमैंट उपरांत मुख्यमंत्री हुडडा ने डी जी पी निर्मल सिंह को हरियाणा पुलिस कारपोरेशन का चेयरमैन बनाया था, मगर इसे स्वीकार नहीं किया था। हुडडा के शासन काल में रिटायर हुए जी.माधवन को मुख्य सूचना आयुक्त, मीनाक्षी आनंद को सूचना आयुक्त तथा बाद में सूचना आयुक्त, प्रेम प्रशांत को मुख्य सचिव उपरांत प्रशासनिक आयोग का सदस्य, मुख्य सचिव धर्मवीर को चुनाव आयुक्त हरियाणा, प्रोमिला ईस्सर को कैट सदस्य बनाया जा चुका है।

उर्वशी गुलाटी को सेवानिवृत्ति उपरांत राजकुमार को मुख्य सचिव बनाये जाने की संभावना है, क्योंकि 1976 बैच के आर एस गुजराल और अनीता चौधरी केंद्र में डैपुटेशन पर सचिव पद है। इस प्रकार 1977 बैच के सीनियर आई ए एस राजकुमार ही है, जो वर्तमान में वित्तायुक्त राजस्व के पद पर कार्यरत है।

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