प्रत्याशी पसंद नही तो फार्म 17 भरें मतदाता

पांडेय ने इसे जरूरी बताते हुए कहा कि इलेक्ट्रोनिक वोङ्क्षटग मशीन में ही फार्म 17 की व्यवस्था हो ताकि मतदाता प्रत्याशियों के पसंद नही आने का भी विचार दे सके लेकिन ऐसा होता नही है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को यदि कोई भी प्रत्याशी पसंद नही आता है या उसकी उपेक्षा के अनुरुप नही हो तो यह फार्म 17 भरकर अपना मत व्यक्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अंकुश के बावजूद प्रत्याशी करोड़ों खर्च कर रहे हैं।
पाण्डेय ने कहा कि हाल ही में एक खबरिया चैनल के ङ्क्षस्टग आपरेशन में प्रत्याशियों ने स्वीकार किया कि वह निर्वाचन आयोग की खर्च की तय सीमा 16 लाख से कई गुणा ज्यादा खर्च करेंगे। जाहिर है कि ज्यादा किया गया खर्च काला धन होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जनप्रतिनिधि से भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून बनाने में मदद करने की अपेक्षा नही की जा सकती।
पांडेय ने कहा कि संसद में तीन सौ से ज्यादा करोड़पति और डेढ़ सौ से ज्यादा आपराधिक छवि वाले सदस्य है। चुनाव में यह सवाल खड़ा हुआ है कि भ्रष्ट और अपराधी छवि वाले प्रत्याशी पर अंकुश लगाया जाये। उन्होंने कहा कि इसका तरीका मतदाताओं के पास है। यदि मतदाता किसी भी प्रत्याशी को पसंद नही करता तो संविधान की धारा 49 'ओÓ के तहत फार्म 17 मांग कर अपना मत किसी को नही देने की मंशा जाहिर कर सकता है।
मतदाताओं के पास अवांछनीय प्रत्याशी को खारिज करने का अधिकार है। श्री पांडेय ने कहा कि इस प्राविधान के बावजूद मतदान केन्द्रों पर फार्म 17 जल्द नही उपलब्ध कराया जाता। मतदान अधिकारी यह फार्म देने से बचना चाहते हैं। इस मु य वजह यह है कि यदि मतदातओं ने बड़ी सं या में राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को खारिज करना शुरु किया तो इसे परेशानी खड़ी हो सकती है।
उन्होंने मांग की कि निर्वाचन आयोग जिस तरह मतदान के लिए जागरुक कर रहा है उसी तरह किसी प्रत्याशी के नही पसंद आने पर फार्म 17 के इस्तेमाल का भी प्रचार करना चाहिए, इससे लिए विज्ञापन जारी कर मतदाताओं का जागरूक करने की जरूरत है।












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