दूसरे आपरेशन के बाद भी मौत से लड़ रही है फलक

All India Institute of Medical Sciences (AIIMS)
दिल्ली (ब्यूरो)। एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती फलक की जिंदगी अभी भी खतरे में हैं। डाक्टर कह रहे हैं कि अगर 72 घंटे के अंदर उसमें सुधार के लक्षण दिखे तो वह बच सकती है वरना क्रूर मानव से मिले जख्म के कारण यह नन्ही परी दुनिया देखने से पहले ही इस दुनिया से जुदा हो जाएगी। इस बीच पुलिस ने कहा है कि उसकी मां के बारे में कुछ सुराग लगे हैं। जिंदगी और मौत से जूझ रही दो साल की फलक के लिए अगले 72 घंटे बेहद नाजुक हैं। मंगलवार को दूसरी सर्जरी के बाद फलक ने न सिर्फ हाथ पैर हिलाया, बल्कि आंखें खोलकर डॉक्टरों को देखा भी। फलक के मस्तिष्क का संक्रमण समाप्त नहीं होने से डॉक्टरों को चिंता सता रही है।

ट्रामा सेंटर प्रमुख डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि बुधवार को कल्चर रिपोर्ट आने के बाद एंटीबायोटिक के बारे में फैसला लिया जाएगा। ट्रामा सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ. सुमित सिन्हा का कहना है कि फलक अभी भी बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। सबसे बड़ा खतरा संक्रमण है जो न मस्तिष्क और छाती में भी है। वह वेंटिलेटर पर है। उसकी सेहत सुधारने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। अगले 72 घंटे सही तरीके से गुजर जाए तो स्थिति बदल सकती है। संक्रमण समाप्त हो जाने के बाद ही बेहतर उम्मीद की जा सकती है।

डॉ. मिश्रा का कहना है कि यदि कल्चर रिपोर्ट सही आई तो वर्तमान में चल रहे एंटीबायोटिक को चालू रखा जाएगा अन्यथा बदल दिया जाएगा। यह सौभाग्य की बात है कि फलक अब आंख खोल रही है और हाथ-पैर भी चला रही है। यह संकेत दे रहा है कि फलक का मस्तिष्क सही तरीके से काम कर रहा है। खाना पाइप के सहारे दिया जा रहा है और सही तरीके से हजम भी हो रहा है। इसके बावजूद डाक्टर कह रहे हैं कि 72 घंटे महत्वपूर्ण है। अगर यह ठीक तरीके से निकल गए तो मुमकिन है इस बच्ची को जिंदगी मिल जाए। मालूम हो कि कई गंभीर जख्मों के कारण फलक को 18 जनवरी को एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया था। फलक के सिर में गंभीर चोट लगने के कारण खून जम गया था और दांत काटने के निशान भी है।

फलक को एक किशोरी श्वेता किशोरी लाई थी और उसकी मां होने का दावा किया था। उधर, दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि फलक जल्द ही असली मां के हाथों में होगी। उसकी असली मां के बारे में अहम सुराग हाथ लगे हैं। एक टीम उसकी मां को लेने के लिए रवाना कर दी गई है। जांच में पता चला है कि फलक की मां मुन्नी ने दूसरी शादी कर ली है। असली मां के आने के बाद ही इससे पर्दा उठ सकेगा कि आखिर फलक की इस हालत के लिए कौन जिम्मेदार है।

मुन्नी करीब 20 से 25 दिन लक्ष्मी के मोहन गार्डन स्थित घर में रह रही थी। मुन्नी इस समय बिहार में कही हो सकती है। वहीं, राजकुमार उर्फ दिलशाह अहमद के बारे में पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। मनोज राजकुमार का ड्राइवर रह चुका है। उसने काफी दिनों तक राजकुमार की गाड़ी चलाई थी। मनोज के बारे में भी पुलिस को कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। दक्षिण जिला पुलिस की एक टीम इस समय बिहार और दूसरी मुंबई में है।

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