कुशवाहा ने खनन पट्टे में भी किये हैं बडे खेल

लोकायुक्त की जांच में कुशवाहा पर लगाए गए ज्यादातर आरोप सही पाए गए हैं। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि जांच में पाया गया है कि महोबा व बांदा में बड़े-बड़े क्षेत्रफल के खनन पट्टे कुशवाहा ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के साथ अन्य औपचारिकताएं पूरा किए बिना सगे-संबंधी गिरधारी लाल कुशवाहा व दिलीप कुमार सिंह को ही दे दिए। वास्तविक आवेदक न होकर फर्जी नामों से भी पट्टे देकर कुशवाहा ने खुद भी खनन कार्य किया है। लोकायुक्त को लगता है कि ऐसा इसलिए किया गया होगा क्योंकि बांदा के भूरेडी-दूरेडीमें 508.92 एकड़ अकेले दिलीप के नाम आवंटित करना संभव न था।
इसी तरह 29.64 एकड़ जमीन का खनन पट्टा ग्राम नसेनी में व 10 एकड़ लड़का पुरवा-भवनानी पुरवा में दिया गया है। जांच में यह भी मिला है कि तथागत शिक्षण स्थली लखनऊ, श्रीनाथ प्रापर्टीज बांदा, श्री भागवत प्रसाद वेलफेयर ट्रस्ट लखनऊ, मेसर्स शिवा वाइन्स बांदा तथा ऐक्सस एजूकेशनल सोसाइटी कानपुर कुशवाहा व उनके सगे संबंधियों की फर्म्स व सोसाइटीज हैं।
लोकायुक्त को लगता है कि कुशवाहा ने आय के अज्ञात स्त्रोत से जमा की गई धनराशि को उक्त फर्म्स व सोसाइटीज में लगाया गया है। खनन पट्टे की अवैध कमाई को उक्त संस्थाओं के माध्यम से वैध बनाने की कार्यवाही की गई है। लोकायुक्त का कहना है कि चूंकि जिनके नामों से फर्म व सोसाइटीज हैं वे लोक सेवक नहीं है इसलिए वह उनकी जांच नहीं कर सकते हैं।












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