मायावती दलितों में एक ही जाति को देती हैं मौका
शाही ने कहा कि वर्तमान में जातिवाद काफी हावी हो गया है उनका कहना है कि जातिवाद मीडिया और कुछ राजनीतिक दलों की वजह से बुनियादी मुद्दों पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी मूल समस्याओं पर एकाग्रचित होकर मतदान करना चाहती है लेकिन कुछ राजनीतिक दल और मीडिया की वजह से जनता की यह भावना पूरी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि मायावती पूरे दलित समाज का हितैषी होने का दावा करती है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। वह सिर्फ सजातीय लोगों को ही बढ़ावा देती हैं।
उनका कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 88 दलितों को टिकट दिया है जबकि 78 केवल उन्हीं की जाति के हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मायावती धोबी, धानुक, खटिक, कोरी, पासी व वाल्मिक जैसी दलितों की जातियों के साथ सौतेला व्यवहार करती हैं, लेकिन पूरे दलित समाज का रहनुमा होने की बात करती हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना बुखारी ने समाजवादी पार्टी के समर्थन में फतवा जारी कर साम्प्रदायिक कार्य किया है इसके लिए जनता को गंभीरता से सोचना होगा। उन्होंने कहा कि सभी दलों में मुस्लिम वोट बैंक को अपनी तरफ आकॢषत करने की होड़ लगी हुई है इसी के चलते कोई बटला हाऊस मुठभेड कांड को फर्जी बता रहा है तो कोई दिल्ली पुलिस के शहीद निरीक्षक अमरनाथ शर्मा की शहादत पर पानी फेरने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह होड़ देश की सुरक्षा के लिए घातक है।













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