सियासी जंग में वरुण गांधी का इम्तहान शुरू

तब उनकी खानदानी ख्याति के मद्देनजर भाजपा हाईकमान ने वरुण गांधी को पार्टी के यूथ फोरम भाजयुमो की बागडोर संभालने का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके कुछ समय बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें राष्ट्रीय सचिव पद की जिम्मेदारी संभालने का ऑफर दिया गया, तब वरुण गांधी ने यह साफ कर दिया कि वह चुनाव जीतने के बाद ही कोई पद लेंगे। अपने मंसूबे को साकार करने के लिए वरुण गांधी ने पांच साल के दौरान एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ की भांति रणनीति के तहत पीलीभीत संसदीय सीट को चुना।
इसी सिलसिले में लोकसभा चुनाव से डेढ़ दो साल पहले ही वरुण सक्रिय होकर आम लोगों से जुड़ने लगे थे, चुनाव के ऐन मौके पर वरुण गांधी ने सभाओं में जोशीले अंदाज में भाषण दिये तो उन्हें विवादों ने घेर लिया। इसके चलते उन्हें जेल भी काटनी पड़ी। बसपा सरकार ने उन्हें रासुका में भी निरुद्ध करने में देर नहीं लगाई। राजनैतिक जानकार मानते हैं कि जेलयात्रा ने ही वरुण गांधी को यकायक राजनीति में ऊंचाई दे दी। नतीजे में लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी की तीन लाख मतों के अंतर रिकार्ड जीत हासिल की।
फिलहाल वरुण गांधी भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल हैं। यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी नेतृत्व ने वरुण गांधी की सिफारिश को सबसे ज्यादा महत्व देते हुए दो दर्जन से ज्यादा टिकट दिये हैं। अपने संसदीय क्षेत्र यानि पीलीभीत जिले की चारों सीटों पर वरुण गांधी के पैनल पर ही भाजपा हाईकमान ने मुहर लगाई। वरुण गांधी की सिफारिश पर सदर से सत्यपाल गंगवार, बरखेड़ा से स्वामी प्रवक्तानंद, बीसलपुर से पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा तथा पूरनपुर रिजर्व से रामरतन पासवान को टिकट दिया गया।
इनमें रामरतन पासबान की ओर से अचानक चुनाव लड़ने से इन्कार करने पर अब बाबूराम पासवान के नाम को वरुण गांधी की ओर से हरी झंडी दे दी गई है। सिर्फ टिकट ही नहीं दिलाये हैं वरुण गांधी ने, बल्कि भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी फिजां का रुख करने के लिए वह पूरी शिद्दत के साथ जुट गये हैं। हाल ही में वह पांच दिन के दौरे पर सदर और बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों में सवा सौ से ज्यादा सभाओं को संबोधित कर चुके हैं।












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