चाचा-भतीजे की जंग में अकाली दल का शिवसेना जैसा हाल

चंडीगड़। महाराष्ट्र में शिवसेना और मनसे के तकरार से तो आप वाकिफ ही होंगे। वहां चाचा-भतीजे के बीच अहम की लड़ाई हुई और शिवसेना पार्टी में बिखराव आ गया। भतीजे राज ठाकरे ने चाचा बाल ठाकरे से अलग होकर शिवसेना से नाता तोड़ अपनी पार्टी मनसे का गठन किया। ऐसे ही हालात अब पंजाब में पैदा हो गए हैं। जहां शिरोमणी अकाली दल में फूट पड़ गई है।
चाचा प्रकाश सिंह बादल से उनके भतीजे मनप्रीत की तकरार हुई। नतीजा यहां भी महाराष्ट्र वाला ही रहा। मनप्रीत ने अपनी अलग पार्टी बना ली जिसे नाम दिया पंजाब पीपल्स पार्टी (पीपीपी)। पंजाब में अब यह पार्टी अकाली दल की ही जड़ें काटने में लगी हुई है। इस बार के विधानसभा में पीपीपी उम्मीदवार अकाली दल और भाजपा के गठबंधन को ही नुकसान पहुंचाएंगे जिसका फायदा कांग्रेस को हो सकता है।
अपनी पार्टी का गठन करने से पहले मनप्रीत बादल अकाली-भाजपा गठबंधन वाली सरकार में वित्त मंत्री थे। अब उनका दावा है कि पंजाब में इस बार पंजाब पीपुल्स पार्टी राज्य की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार चाचा प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई वाली सरकार सत्ता से बेदखल हो जाएगी।
महाराष्ट्र में जिस तरह से चचेरे भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलते हुए नजर आते हैं वैसे ही सुखबीर बादल और मनप्रीत बादल आमने-सामने नजर आते हैं। महाराष्ट्र में तो राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर पार्टी को तगड़ा आघात दिया था। अब देखना है कि मनप्रीत बादल के शिरोमणि अकाली दल से अलग होने पर पार्टी पर क्या असर पड़ता है।












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