ममता बनर्जी ने गलत उम्र दिखाकर लड़ा चुनाव

West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee
दिल्ली (ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 1984 का चुनाव के दौरान नामंकन में फर्जी उम्र दिखा कर लड़ा था। इस चुनाव में वह यादवपुर से जीती भी थीं। खुद ममता ने स्वीकार किया है कि दस्तावेज में दर्ज अपनी उम्र से वह पांच साल छोटी हैं। इसका खुलासा ममता ने खुद अपनी नई किताब माई अनफॉरगेटेबल मेमोरीज में किया है। हालांकि वामपंथियों ने इस खुलासे पर ममता को घेर लिया है। सीपीआईएम के एक नेता ने कहा कि ममता सारी उम्र संविधान का उल्लंघन करती रही हैं।

फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट उनके पिता ने बनवाया था ताकि ममता स्कूल की परीक्षा में शामिल हो सकें। अभी तक ममता को 57 साल का माना जाता रहा है। हाल ही में आई ममता बनर्जी की पुस्तक माई अनफॉरगेटेबल मेमोरीज में उन्होंने खुद ये राज बयान किया है। पुस्तक में ममता बनर्जी ने लिखा है कि स्कूल की वार्षिक परीक्षा के वक्त मैं 15 साल की भी नहीं थी और उम्र कम होने के कारण मुझे परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया गया। इस पर मेरे पिता ने नई जन्म तिथि और उम्र वाला सर्टिफिकेट हासिल कर इस समस्या का समाधान किया।

दरअसल, दीदी का जन्म पांच अक्तूबर को हुआ था न कि पांच जनवरी को। पुस्तक में लिखा है कि मां ने एक बार जन्मकुंडली उन्हें दी थी जिसमें असली जन्म तिथि दर्ज है। इस तरह उनके दो जन्मदिन मनाए जाते है। यहां तक कि लोकसभा की वेबसाइट में भी उनकी जन्म तिथि 5 जनवरी 1955 दर्ज है। रोली बुक्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में ममता लिखती हैं कि एक बार गलत जन्म तारीख के लिए उन्होंने अपनी मां से झगड़ा भी किया। तब उनकी मां ने कहा हम शहरी लोगों की तरह नहीं हैं। तुम और तुम्हारा बड़ा भाई अस्पताल में पैदा नहीं हुए तो मैं बर्थ सर्टिफिकेट कहां से लेती। हालांकि जन्म तारीख पर संशय ममता का एक निहायत व्यक्तिगत मसला है।

1984 में जब से वह सांसद बनीं उन्हें पांच जनवरी को ही जन्म दिन की शुभकामनाएं दी जाती हैं। लेकिन मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं लेना अच्छा नहीं लगता। मैं कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाती। ये मेरे व्यवहार में नहीं है। उनका बड़ा भाई भी अकसर उनसे मजाक में कहता है कि स्कूल सर्टिफिकेट के हिसाब से ममता मुझसे सिर्फ छह महीने छोटी हैं। ममता कहती हैं कि ये कोई अनोखा मामला नहीं है। हजारों बच्चे जो गांवों में पैदा हुए हैं, उन्हें इस समस्या का सामना करना पड़ता है। मैंने लोगों को फर्जी सर्टिफिकेट की बदौलत रिटायरमेंट की उम्र के बाद भी काम करते देखा है। वह खुद चाहती हैं कि उनकी उम्र का सच लोगों के सामने आए। इस पुस्तक में कुछ दुर्लभ फोटो के अलावा ममता की जिंदगी के अनछुए पहलुओं का जिक्र किया गया है।

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