दिल्‍ली सरकार का दावा, दिल्ली में मिलता है शुद्ध दूध

Milk
दिल्ली (ब्यूरो)। दिल्ली सरकार की माने तो राजधानी में बिल्कुल शुद्ध दूध की नदियां बह रही है। सरकार का दावा है कि दिल्ली में मिलनेवाले दूध में कोई मिलावट नहीं है। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि पैकेट बंद दूध 100 प्रतिशत तय मानकों को पूरा करता है जबकि खुला दूध भी अधिकांशत: ठीक है, नाममात्र में शिकायत पाई गई है। अदालत ने अब केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का समय प्रदान किया है।

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलो की खंडपीठ ने हाल ही में समाचार पत्रों में छपी उन खबरों पर गंभीर रुख अपनाया था कि राजधानी में सप्लाई होने वाले दूध में से 70 प्रतिशत दूध मिलावटी होता है। सरकार ने पेश अपने जवाब में इन तथ्य को गलत ठहरा दिया। सरकार ने जवाब में कहा कि राजधानी में प्रतिदिन 70 लाख लीटर दूध सप्लाई किया जाता है। जिसमें से 60 लाख पैकेट बंद दूध है। मात्र 10 लाख लीटर खुले दूध की सप्लाई होती है।

खाद्य अपमिश्रण विभाग ने एक जनवरी 2009 से चार अगस्त 2011 तक कुल 446 सैंपल लिए गए। इनमें से 379 सैंपल सही पाए गए और दूध तय मानक के अनुसार पाया गया। 67 सैंपल पूरी तरह से ठीक नहीं थे और दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। सरकार ने कहा दूध के किसी भी सैंपल में ग्लूकोज, स्किम्ड दूध पाउडर, डिटर्जेंट, वसा, यूरिया इत्यादि की मिलावट नहीं पाई गई। ऐसा भी कोई तत्व नहीं मिला जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सरकार ने माना कि जो सैंपल ठीक नहीं पाए गए, उनमें भी मात्र अशुद्ध पानी की मिलावट मिली है। दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 11 जनवरी को पैकेट बंद दूध सप्लाई करने वाले गोपालजी, मदर डेयरी, डीएमएस, पारस, परम इत्यादि की बैठक बुलाई गई। सभी ने गुणवत्ता बनाए रखने का आश्वासन दिया है।

गौरतलब है हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। अदालत ने पूछा है कि मिलावटी दूध पर रोकथाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलो की खंडपीठ ने समाचार पत्रों में छपी खबरों पर संज्ञान लेते हुए कहा था कि यह काफी गंभीर मामला है कि राजधानी में सप्लाई होने वाले दूध में से 70 प्रतिशत दूध मिलावटी होता है। अदालत ने कहा था कि इससे आम लोगों विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ता है। खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के खाद्य अपमिश्रण विभाग और खाद्य सुरक्षा मानक अथारिटी आफ इंडिया को भी नोटिस जारी कर 25 जनवरी तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत दिल्ली सरकार ने कोर्ट के सामने रिपोर्ट पेश की।

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