विक्रमजीत सिंह होंगे नए जनरल: सरकार
भले ही रक्षा मंत्रालय ने तल्खी दिखाते हुए अब इस मुद्दे को न्यायपालिका के ही निर्णय पर छोड़ने को कह दिया हो। पहले रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा और उसके बाद रक्षा राज्यमंत्री एमएम पल्लमराजू से मुलाकात में समझौते की औपचारिक तौर पर पेशकश कर चुके जनरल सिंह अगले सप्ताह अपनी इस कोशिश को और आगे ले जाते नजर आ सकते हैं। जनरल सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी इसी वजह से मुलाकात का समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार जनरल सिंह रक्षा मंत्री एके एंटनी से भी अगले सप्ताह एक और दौर की बैठक करना चाह रहे हैं।
साउथ ब्लॉक के सूत्रों के अनुसार जनरल सिंह के करीबी आला अधिकारियों ने\ भी सरकार और सेना प्रमुख के बीच टकराव टालने के मार्ग तलाशने की कोशिशें परवान चढ़ा रखी हैं। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों ने एंटनी से बात कर जनरल के साथ एक बैठक करने का आग्रह भी किया है। यही नहीं सेना के इन अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से बात कर इस मामले में सुलह की कोशिश करने का आग्रह किया है।
सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्रालय को औपचारिक तौर पर जनरल ने यह पेशकश कर दी है कि जन्मतिथि को लेकर उनके दावे को मंजूर कर सरकार उनके सम्मान की रक्षा करे तो वह इसी साल मई में ही रिटायरमेंट ले लेंगे। सेनाध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार लेफ्टिनेंट जनरल विक्रमजीत सिंह पर मुठभेड़ के मामले पर विवाद है। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें जनरल बनाने का फैसला कर लिया है।
सूत्रों के मुताबिक जल्द ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी। इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने अगले थलसेना प्रमुख के चयन के लिहाज से
अधिकारियों का पैनल गठित किया था जिसमें सर्वाधिक वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल शामिल हैं। तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में पूर्वी सेना कमांडर
लेफ्टिनेंट जनरल विक्रम सिंह, उत्तरी सेना कमांडर के लेफ्टिनेंट जनरल के टी परनायक और मौजूदा उप थलसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल श्रीकृष्ण सिंह हैं।
सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति के लिए पश्चिमी सेना कमांडर के लेफ्टिनेंट जनरल शंकर राजन घोष के नाम पर विचार नहीं किया गया जो थलसेना प्रमुख का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही 31 मई को सेवानिवृत्त होंगे। परंपरागत रूप से सेना प्रमुख के तौर पर पैनल के सबसे वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति की जाती है। इस मामले में लेफ्टिनेंट जनरल विक्रम सिंह सबसे वरिष्ठ हैं और उनका दावा पुख्ता माना भी जा रहा था। शेष दो अधिकारियों में से लेफ्टिनेंट जनरल परनायक वरिष्ठता क्रम में लेफ्टिनेंट जनरल श्रीकृष्ण से उपर हैं।













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