सेनाध्यक्ष से खफा हैं रक्षा मंत्री एके एंटनी

इनकी नाराजगी रक्षा राज्यमंत्री एमएम पल्लम राजू के माध्यम से जारी हुई। रक्षा राज्यमंत्री ने कहा, यह सरकार और सेना दोनों के लिए स्वस्थ परंपरा नहीं है। उन्होंने इसे संवेदनशील मुद्दा बताते हुए इस पर किसी सार्वजनिक बहस से इंकार किया। इस बीच सूत्रों के मुताबिक मुलाकात के बाद रक्षा सचिव शर्मा के कक्ष में सेना प्रमुख और उनकी बातचीत हुई। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई इस पर दोनों ही खेमे मौन हैं। वैसे सरकार सेनाध्यक्ष के अदालत में जानी की खबर मीडिया के सहारे मिलने को लेकर अपनी नाखुशी जता चुकी है। सेना प्रमुख के खिलाफ सरकार की पेशबंदी में उनके अदालत में जाने की बजाए जोर मीडिया के जरिए खबर मिलने की खिन्नता पर ज्यादा है।
सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी मामले के अदालत पहुंचने और इसे संभालने में रहीं खामियों पर अपनी अप्रसन्नता भी जताई है। हालांकि मंत्रालय की दलील है कि सेनाध्यक्ष ने अदालत न जाने का आश्वासन देने के बाद यह कदम उठाया। मामले में सरकार की चिंता न केवल एक नई परंपरा का दरवाजा खुलने की है, बल्कि न्यायालय की चौखट पर पहले से उलझे दामन के लिए परेशानियां बढ़ने की भी हैं। हालांकि अपनी पेशबंदी में सरकार जहां जनरल के खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई को खारिज कर रही है, वहीं कानूनी लड़ाई के लिए भी तैयार कर मजबूत कर रही है। उधर, ऐसी चर्चा है कि सरकार और सेनाध्यक्ष के बीच किसी एक बात को लेकर सहमति हो गई है। संभव है कि उम्र विवाद का जल्द ही पटाक्षेप हो जाए।












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