बाबरी विध्वंस को कुख्यात या प्रख्यात न कहें: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली (ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाबरी मसजिद विध्वंस महज एक घटना थी और इसमें प्रख्यात अथवा कुख्यात जैसा कुछ भी नहीं है। कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे और 19 अन्य लोगों के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर कोर्ट ने यह टिप्पणी की। इसके साथ ही अदालत ने ठाकरे समेत अन्य पक्षकारों की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने की वजह से मामले की सुनवाई 27 मार्च तक के लिए टाल दी।

बाबरी विध्वंस को कुख्यात या प्रख्यात न कहें: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस सीके प्रसाद की पीठ ने कहा कि इसके बारे में क्या मशहूर है। यह एक घटना थी, जो घटी और इस मामले के सभी पक्ष हमारे सामने हैं। अदालत ने यह टिप्पणी एडीशनल सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) की ओर से दी गई उस दलील पर की, जिसमें उन्होंने कहा था कि मामला मशहूर बाबरी विध्वंस मामले से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद कुछ पक्षों ने अभी तक इस मामले में जवाब दायर नहीं किया। शीर्षस्थ अदालत ने अपनी टिप्पणी के साथ ही पक्षकारों को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई की तिथि टाल दी।

सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में पिछले साल 4 मार्च को 21 लोगों को नोटिस जारी किया था, जिसमें आडवाणी, ठाकरे, कल्याण सिंह, उमा भारती, सतीश प्रधान, सीआर बंसल, एमएम जोशी, विनय कटियार, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, साध्वी ऋतंभरा, वीएच डालमिया, महंत अवैद्यनाथ, आरवी वेदांती, परमहंस रामचंद्र दास, जगदीश मुनि महाराज, बीएल शर्मा, नृत्य गोपाल दास, धरम दास, सतीश नागर और मोरेश्वर सावे के नाम शामिल थे।

अदालत ने इन सभी से पूछा था कि बाबरी मसजिद ढहाए जाने के मामले में क्यों न उनके खिलाफ फिर से आपराधिक साजिश के मामले शुरू किए जाएं। सीबीआई ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 21 मई, 2010 के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के उस फैसले को बहाल रखा था, जिसमें नेताओं के खिलाफ साजिश के तहत आरोप बहाल करने की मांग खारिज कर दी गई थी।

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