गूगल ने कहा आपित्तजनक कंटेंट विचारों की आजादी

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दिल्ली (ब्यूरो)। गूगल व फेस बुक ने कोर्ट में अश्लीलता और कथित रूप से आपत्तिजनक सामाग्री को भाषण और विचार रखने की स्वतंत्रता के मुद्दे से जोड़ने का प्रयास किया। गूगल ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश की तुलना चीन से नहीं की जा सकती। वहीं फेसबुक ने कहा कि हम सबसे अलग हैं और अपने सदस्य बनाकर काम कर रहे हैं हम सर्च इंजन भी नहीं है।

उधर, शिकायतकर्ता ने कहा कि सभी एक दूसरे से मिले हुए हैं और उनका एक मात्र उद्देश्य किसी न किसी तरह पैसा कमाना है। अदालत ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए किसी भी साइट को राहत देने से इंकार कर दिया। मामले की सुनवाई अब 19 जनवरी को होगी। न्यायमूर्ति सुरेश कैथ ने सुनवाई के दौरान गूगल के अधिवक्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि हम मात्र भारत में विज्ञापन एकत्रित कर रहे हैं और अमेरिका से गूगल का नियंत्रण है और हम मात्र विज्ञापन एकत्रित करने वाले हैं।

अदालत ने कहा आप इस तर्क का हवाला देकर बच नहीं सकते, क्या आपको राजस्व नहीं मिल रहा। इससे पूर्व गूगल की ओर से पेश अधिवक्ता एनके कौल ने तर्क रखा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और हर व्यक्ति को भाषण और अभिव्यक्ति का अधिकार है। उन्होंने कहा कि चीन के समान भारत में प्रतिबंध लगाने से आम लोगों के इस अधिकार का हनन होगा जबकि चीन में भारत की तरह लोकतंत्र नहीं है और न ही खुले रूप से विचार रखने की आजादी।

उन्होंने उक्त तर्क अदालत द्वारा शुक्रवार को अश्लीलता पर रोक न लगाने पर चीन के समान भारत में भी प्रतिबंध लगाने संबंधी दी चेतावनी पर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा संवैधानिक मुद्दा है और रोक से विचार रखने की स्वतंत्रता पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। चीन में ऐसा नही है और इसी आधार पर इस मुद्दे पर गहराई से समीक्षा की जानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिना जांच इस प्रकार कानूनी कार्रवाई उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि अश्लीलता के लिए हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने अदालत को यह समझाने का प्रयास किया कि किस प्रकार गूगल पर काम होता है। उन्होंने कहा कि हम मात्र होम पेज देते हैं और जो भी व्यक्ति उसका प्रयोग करता है वह अपनी इच्छानुसार अपना विषय सर्च करता है। इंटरनेट एक विश्वस्तरीय सिस्टम है और कंपनियां, सरकार व उनके विभाग अन्य लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कि कहा कि मात्र 33 सेकेंड में 82.30 करोड़ परिमाण आते हैं और प्रतिबंध से लोग इस जानकारी से वंचित हो जाएंगे।

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता हरि हरण ने उनके तर्कों को गलत बताते हुए कहा कि गूगल, फेस बुक सहित सभी साइटों का एक मात्र काम किसी न किसी तरह पैसा कमाना है और वे ऐसा कर भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सर्विस भी दे रहे हैं और सर्च इंजन भी हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के जरिए व्यवसाय कर पैसा तो कमाना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारी से बच रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत इस प्रकार की गतिविधियों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। अदालत ने मामले की सुनवाई अब 19 जनवरी को तय की है।

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