चुनाव आयोग के चाबुक से अकाली-भाजपा सकते में

चंडीगढ़। चुनाव आयोग के निर्देश पर पंजाब में व्यापक स्तर पर किए गए तबादलों, भारी मात्रा में धनराशी, शराब व नशीली वस्तुओं की बरामदी ने अकाली-भाजपा के इरादों पर तुषारापात कर दिया है। प्रदेश में चुनाव आयोग के चाबुक से सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा में कंपन पैदा हो गई है, क्योंकि स्वतंत्र व न्यायपूर्ण विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने कमर कसी हुई है। हरियाणा में चौटाला शासन में प्रमुख सचिव रहे सुप्रीमों प्रकाश सिंह बादल से उम्मीद थी कि उनके करीबी पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा ओम प्रकाश चौटाला से मदद ली जाएगी, मगर बादल की यह मंशा पूरी नहीं हो पा रही।

राज्य की चुनावी राजनीति में बदलाव लाने पर अकाली-भाजपा विवश हो गई है। मुख्यमंत्री बादल ने चुनाव आयोग की शिकायत प्रधानमंत्री तक भी को, मगर चुनाव आयो एक स्वतंत्र इकाई है, इसमें कुछ नहीं कर सकता, कहकर प्रधानमंत्री ने भी पल्ला झाड़ लिया।

बादल को उम्मीद थी कि पिछले पांच वर्षीय शासन दौरान प्रधानमंत्री का पंजाब और उनके प्रति साफ्ट कार्नर रहा है और अब भी चुनाव आयोग मामले में प्रधानमंत्री सहायक सिद्ध होंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। राज्य में चुनाव जीतने के लिए बादल बंधुओं ने प्रदेश भर में अपने चहेते अफसरों की तैनाती की थी, मगर चुनाव आयोग को मिली शिकायतों ने चहेते अफसरों को बदल दिया, जिससे मुख्यमंत्री बादल खफा हो उठे और मुख्य चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव आयोग को अपनी सीमा में रहने की सलाह देकर एक ऑफत मोल ली, क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त ने भी जवाबी खत लिखकर उनकी बातों का कड़ा जवाब दिया, जिससे अकाली-भाजपा शासन में हडकंप मच गया है। राज्य के चुनाव पर्यवेक्षकों को चुनाव आयोग का निर्देश है कि आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन बर्दाश्त न करते हुए मतदान केंद्रों पर शांति सुनिश्चित करें, जबकि संवेदनशील मतदान केंद्रों की वीडियोग्राफी की जाए। चुनाव आयोग की स्वतंत्र व निस्पक्षीय कार्यप्रणाली से अकाली-भाजपा सकते में दिखाई देते है।

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