एसएमएस नहीं इस बार पोस्‍टकार्ड से प्रचार कर रहे प्रत्‍याशी

दिल्ली (ब्यूरो)। एसएमएस पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की पाबंदी से हाईफाई चुनाव प्रचार करनेवालों को जबरदस्त धक्का लगा है। एक दिन में अधिकतम 200 एसएमएस की लिमिट तय कर दी गई है। मजबूरी में हाईटेक प्रचारक पुराने दिनों में लौट आए है। प्रचार के लिए वे पोस्ट कार्ड का सहारा ले रहे हैं। वैसे संकट में चल रहे पोस्टल विभाग को चुनाव प्रचार की वजह से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ होने का अनुमान है।

पिछले लोकसभा चुनावों में राजनीतिक दलों ने जमीनी चुनावी अभियान की जगह हाईटेक तरीके से प्रचार को अधिक महत्व दिया था। इनमें लोगों को चुनावी एसएमएस भेजने का तरीका सबसे ज्यादा चलन में आया था, लेकिन इस बार राजनीतिक दल ट्राई की पाबंदी की वजह से ऐसा करने से परहेज कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में मतदान की तारीख करीब आ गई हैं, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने हाईटेक चुनाव प्रचार को लेकर कोई खास योजना नहीं बनाई है।

कांग्रेस जहां इस बार पोस्टर, चुनावी झंडे और टीवी विज्ञापन के जरिए चुनाव प्रचार की योजना बना रही है, वहीं भाजपा जमीनी स्तर पर प्रचार पर ज्यादा जोर दे रही है। कांग्रेस के चुनाव प्रचार से जुड़े एक अहम रणनीतिकार ने बताया कि मोबाइल फोन के जरिए एसएमएस से प्रचार पर ज्यादा ध्यान दिया नहीं जा रहा है। उम्मीदवारों को हाईटेक के बजाय ज्यादा से ज्यादा जमीनी स्तर पर प्रचार करने के लिए कहा गया है। इसमें डाक के जरिए पोस्ट कार्ड भेजकर चुनाव प्रचार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। डाक विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में खासकर पोस्ट कार्ड की बिक्री में खासी वृद्घि हुई है। सूबे के ग्रामीण इलाकों में पोस्ट कार्ड चुनाव प्रचार का लोकप्रिय तरीका माना जाता है।

डाक विभाग को उम्मीद है कि एसएमएस पर पाबंदी के कारण चुनावी राज्यों में पोस्ट कार्ड की बिक्री में भारी वृद्धि होगी। हालांकि डाक विभाग ने इसे लेकर कोई आकलन नहीं किया है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक डाक विभाग को 100 करोड़ से ज्यादा मुनाफा होने की उम्मीद है।

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