बारावफात से बदली यूपी में मतदान की तारीख
चुनाव आयोग ने रविवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में शुक्र और शनिवार को हुई समीक्षा बैठक के दौरान कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों और जिला चुनाव अधिकारियों ने बताया कि इस त्योहार की तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन मुमकिन है कि यह चार फरवरी को ही मनाया जाए। ऐसे में इस दिन मतदान करवाना ठीक नहीं होगी। इसलिए आयोग ने इस चरण के मतदान को फिलहाल स्थगित कर दिया है। मंगलवार को ही पहले चरण के लिए अधिसूचना जारी हो जानी थी, मगर अब इसे टाल दिया गया है। प्रदेश के पहले चरण के मतदान में शामिल 60 सीटों में से अधिकांश पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हैं। यहां बड़ी तादाद में मुस्लिम आबादी बसती है। जिन स्थानों पर चुनाव होंने थे उसमें बिजनौर, मुरादाबाद, संभल , रामपुर, अमरोहा यानी ज्योतिबा फुले नगर, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर शामिल हैं।
आचार संहिता में फंसे मंत्री स्वामी प्रसाद
उधर, कुशीनगर से खबर है कि बसपा के प्रदेश अध्यक्ष व पंचायत राज मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य भी रविवार को आचार संहिता उल्लंघन पर आयोग के शिकंजे में फंस गए। पंचायती राज मंत्री के पीए समेत दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। नगर के एक होटल में बिना अनुमति बैठक कर बसपा नेता ने कार्यकर्ताओं के कई टिप्स दे रहे थे। एक कमरे में कुछ उच्चाधिकारी मंत्री की मौजूदगी में पहले की तारीख में इंदिरा आवास व अन्य योजनाओं का चेक काट रहे थे। उस कमरे में गोपनीय नाम पर मीडिया को रोका गया। इसी के बाद हंगामा हुआ। नाश्ते के लिए कार्यकर्ता आपस में उलझ गए। इसमें छावनी निवासी गोल्डेन नामक युवक घायल हो गया। इसकी सूचना पर कोतवाल काजी इब्राहीम पहुंच गए। होटल के मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया । यहां बिना अनुमति के कार्यक्रम चल रहा था। बैठक के बाद एक अलग कमरे में मंत्री खुद प्रधानों को अलग से दिशा निर्देश दे रहे थे। यहां जब अधिकारी पहुंचे तो 26 किग्रा मिठाई व डेढ़ सौ से अधिक चाय बनी मिली। एसडीएम की तहरीर पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 171 घ के अंतर्गत पंचायतीराज मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल, पूर्व प्रमुख विक्रमा यादव व आर के खिलाफ दर्ज किया है।













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