मौत से जंग लड़ रहे हैं दुर्लभ प्रजाति के उल्लू

इसके बावजूद चार बच्चों में से एक इंफेक्शन का शिकार होने लगा है। उल्लूओं की मां ने मरने से पहले आठ बच्चों को पेड़ की खोखर में जन्म दिया। उनमें से चार बच्चे मां की तलाश में खोखर से बाहर झांके तो गिरकर मर गए। बचे चार जो जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इन बच्चों को लिए मसीहा बना भंवर लाल स्वामी 11 सालों से वन्य प्राणियों को बचाने की मुहिम चलाए हुए है।
फिर भी नवजात उल्लुओं को छूने भर से इंफेक्शन का डर है। गिद्ध के आकार के बड़े उल्लू की नस्ल के ये बच्चे तीन दिन से बे-आसरा हैं। भाल सिंह और भंवर लाल ने वन्य प्राणी निरीक्षक से बात की परंतु उन्होंने बाहर होने की जानकारी दी। इस पर वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया, नोएडा संपर्क किया गया तो उन्होंने बेहद दुर्लभ प्रजाति का हवाला देते हुए खुद ही देखभाल करने की नसीहत दे डाली।
खेत में ईटों की आड़ में चार बच्चों को ठंड व रोशनी से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश भर में नहीं संरक्षण केंद्र जीव-जंतुओं की लगातार लुप्त होती जा रही प्रजातियों को बचाने के लिए वन्य जीव प्राणी विभाग कहने को लाख मशक्कत कर रहा है। सच्चाई यह है कि अभी तक विभाग के पास एक भी जीव संरक्षण केंद्र नहीं है। यही कारण है कि अन्य पक्षियों की भांति उल्लू की प्रजातियां भी खत्म होने के कगार पर हैं। प्राकृतिक माहौल चाहिए वन्य प्राणी विभाग के मंडलीय अधिकारी शक्ति सिंह का कहना है कि उनके पास को संरक्षण केंद्र नहीं है। नवजात उल्लुओं को प्राकृतिक माहौल देकर ही बचाया जा सकता है। उन्हें अंधेरे में रखा जाए वरना रोशनी से आंखे जा सकती है। उन्हें छूने भर से इंफेक्शन होने पर मौत हो सकती है।












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