'मीडिया का अपराधी बनने से नहीं बच पाए पीएम'

उन्होंने कहा कि उस अवसर पर प्रधानमंत्री ने गुप्त की जीवनी का भी लोकार्पण किया। उस जीवनी में बताया गया है कि कैसे 26 जून 1975 को घोषित आपातकाल का विरोध करने पर जागरण के संस्थापक को जेल में डाल दिया गया। जीवनी में आपातकाल के अगले दिन के जागरण का मुख्यपृष्ठ भी छपा जिसकी सुर्खी थी, राष्ट्रीय आपात स्थिति घोषित, सभी विपक्षी नेता बंद।
उसी संस्करण के कोरे सम्पाद्कीय का फोटो भी पुस्तक में छपा है। भाजपा नेता ने कहा कि उस समारोह में सिंह ने प्रेस की आजादी की वकालत करते हुए कहा था कि स्वतंत्र मीडिया भारतीय लोकतंत्र के विकास के लिए जरूरी है। सिंह ने मीडिया से कहा कि वह वस्तुपरकता को बढ़ावा देने और सनसनी फैलाने को हतोत्साहित करने का तरीका ढूंढे।
आडवाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री का आशय शायद यह था कि हमारे देश में इस बारे में आम राय है कि मीडिया पर बाहरी नियंत्रण नहीं होना चाहिए। उन्होने कहा कि हालांकि जीवनी में उल्लेखित आपातकाल के दौरान प्रेस की आजादी पर हुए आघात का सिंह ने जिक्र नहीं किया और ऐसा करते हुए प्रधानमंत्री ने वास्तव में स्वतंत्र भारत के इतिहास में प्रेस की आजादी पर हुए उस सबसे बड़े हमले से अपने को अलग करने का एक अवसर गवां दिया।












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