आत्महत्या के समान है वोट नहीं देना

हम लोग चुनाव को कुछ इस तरह मानते है जैसे किसी का जन्मदिन हो, और हम सब जन्मदिन वाले व्यक्ति के इर्द गिर्द बस हसने, खाने और बधाई देने के लिए होते हैं। क्या आप कभी यह सोचेते हैं कि मताधिकार आपका मानवाधिकार है और अगर आप उसके साथ मजाक कर रहे हैं तो खुद मानवाधिकार का उल्लंघन कर रहे हैं। जैसे खुद को मारने को आत्महत्या कहते हैं। उसी तरह अपना मत का प्रयोग न करके आप ऐसे लोगों को कुर्सी पर बैठा देते हैं, जो आपके अधिकारों के लिए कम ही लड़ते हैं। यानि मत न देना आत्म मानवाधिकार हत्या ही है।
इन सबके इतर क्या कभी आपने सरकार और जन प्रतिनिधिओं से ग्रह कर देने से मना किया। शायद आप अपने घर की कुर्की के डर से खुद ही लाइन में खड़े होकर अपना कर जमा कर देते हैं। लेकिन आप शायद यह नहीं जानते कि सुखा अधिकार अधिनियम में साफ़-साफ़ लिखा है कि आपके घर के सामने सड़क बिलकुल ठीक होनी चाहिए और प्रकाश की प्रयाप्त व्यवस्था होनी चाहिए, नाली साफ़ होनी चाहिए, इसके अलावा वातावरण की वायु पूरी तरह शुद्ध होनी चाहिए.
पर क्या आपके घर के सामने ऐसा है? आप वास्तव में मानव की तरह जी रहे हैं? फिर भी आप अपना कर अदा करने के लिए पागल हुए जा रहे हैं। क्या आपको स्वतंत्र होने का मतलब पता चल पाया है आज तक? आपने कभी नाग निगम को पत्र लिखा कि कोई सुविधा न होने के कारण मैं अपना कर अदा नही करूंगा/करूंगी क्योंकि यह मेरा अधिकार है. या फिर आप कभी न्यायालय गए? शायद नहीं क्योंकि आपको नागरिक होने का मतलब ही आज तक नही पता है।
ज्यादा तर लोग यही सोचते हैं कि सिर्फ हम ही थोड़ी परेशान हैं, सभी तो इस परेशानी से गुजर रहे हैं, तो मैं क्यों बोलूं। इसका फायेदा किसे मिल रहा है? नेता अच्छी तरह जानते हैं कि जानता को सही सड़क से मतलब ही नही है और आपके इसी उपेक्षा के कारण लोग हर दिन सड़क बनवाने के नाम पर घोटाले करते रहते हैं।
देश में भ्रष्टाचार है जब कि उसको बढ़ने में हमने भी सहयोग किया है। अपने अधिकारों को अनदेखा करके आप सब कुछ बदल सकते हैं, पर इसके लिए आपको घरों से बहार निकलना होगा। अपने मत का प्रयोग करना होगा। ताकि आप ऐसे नेताओ को विधान सभा में पहुंचा सकें जो यह जानते हैं कि जानता के अधिकार और गरिमा का मतलब क्या है।
क्या इसके बाद भी आप अपने घर से नहीं निकलंगे? अपने एक मत से इस देश का चेहरा बदलने के लिए ? अखिल भारतीय अधिकार संगठन की यही सोच है कि भारत अब सही अर्थो में जाग जाये और एक बार यह महसूस करे कि जानता, गरिमा, अधिकार का मतलब क्या है। देश का एक नागरिक अपने एक मत से क्या कुछ कर सकता है।
यह सब जानते हुए भी अगर आप वोट नहीं डालते हैं, तो यह आत्महत्या के समान होगा। अगर आपके वोट नहीं देने से गलत व्यक्ति सदन तक पहुंचता है और उसकी वजह से आप विकास कार्यों से महरूम रह जाते हैं, तो उस नरक भरी जिंदगी के जिम्मेदार आप खुद होंगे। यानी अगले पांच साल तक एक बार फिर आपको मर-मर कर जीना होगा।
लेखक परिचय- अखिल भारतीय अधिकार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री जयनारायण पीजी कॉलेज, लखनऊ के रीडर एवं इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के काउंसिलर हैं।
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