मुंडका में टेलीविजन चलाते ही हुआ था धमाका

पश्चिम जिला उपायुक्त (राजस्व) जीएस मीणा का कहना है कि किराएदार थे। हादसे में इनका कोई दोष नहीं है। मकान मालिक को ध्यान रखना चाहिए कि मजबूत मकान बनाए। ऐसे हादसों के जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।सुपन की पत्नी शीला ने बताया कि बुधवार सुबह करीब सात बजे वह बाथरूम के लिए कमरे से निकली। तभी किसी ने बीच वाले कमरे में टीवी चलाया।
टीवी चलते ही जोरदार धमाका हुआ और छत और बीच की दीवार गिर गई। घटना में उसके पति सुपन और बेटे संतोष की मौत हो गई । जख्मी बदरी ने बताया कि धमाके से छत उनके ऊपर गिर गई। उसे मलाल है कि वह अपने परिजनों को नहीं बचा सका। वह हाथ-पैर भी नहीं हिला पा रहा था, जिससे वह बेबस ही पड़ा रहा। जख्मी सुजय ने बताया कि वह कमरे में सुबह खाना बना रहा था। उसके सहयोगी सोए थे। अचानक धमाके के साथ छत गिरने गई। उसने भागने की कोशिश की लेकिन छत का कुछ हिस्सा उसके सिर पर गिर गया।
गौरतलब है कल मुंडका में धमाके से एक मकान गिर गया था। इसमें दबकर हेमा (8), अविनाश (12), संतोष (15), सुपन (60) और मोहन (32) की मौत हो गई जबकि पुष्पा (30), बदरी (35), सुजय (19), देवो मंडल (18), गणेश (18), वृजकिशोर (19), बिट्टू (15) और अंजली (10) जख्मी हो गए। घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा था, जहां एक की हालत नाजुक बनी हुई है।
पुलिस के अनुसार छह कमरों के इस मकान में मूलत: छपरा (बिहार) निवासी बदरी सपरिवार मुंडका रेलवे कालोनी के ए-ब्लॉक के मकान संख्या 145 में बतौर किराएदार रहता है। मकान में बदरी और उसके जीजा का परिवार और गांव के लोग तीन कमरों में रहते है। तीनों परिवार में कुल पंद्रह सदस्य है। सभी मजदूरी करते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह मकान बहादुरगढ़ निवासी राजेश का है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बुधवार सुबह करीब सात बजे अचानक धमाका हुआ और छत गिर गई। छत और मकान का हिस्सा गिरने से 13 लोग दब गए। वहां आग भी लग गई थी जिसे लोगों ने बुझा दिया। लोगों ने मलबे में लोगों को निकाला। सूचना मिलने पर चार पीसीआर वैन पहुंची। सभी को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डाक्टरों ने पांच को मृत घोषित कर दिया था।












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