कपिल सिब्बल नहीं ला पाए संसद में एक भी बिल

शिक्षा सुधार से संबंधित संसद में जो विधेयक पारित होने का राह देख रहे हैं जिसमें छात्रों से होने वाली धन उगाही संबंधी विधेयक, शिक्षकों व शिक्षण संस्थानों से जुड़े विवादों को निपटाने के लिए शैक्षिक न्यायाधिकरण विधेयक, सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों को अनिवार्य मान्यता के लिए राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण बनाने संबंधी विधेयक, देश में विदेशी शिक्षण संस्थानों के आने व उनके संचालन संबंधी विधेयक, फर्जी मार्कशीट व शैक्षिक प्रमाण पत्रों को रोकने के लिए राष्ट्रीय अकादमिक डिपोजिटरी (आनलाइन) बनाने जैसे जरूरी विधेयक शामिल हैं।
इसी तरह राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (संशोधन) विधेयक भी संसद में फंसा पड़ा है। जबकि इस विधेयक में जरूरी संशोधन के जरिए राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा व शोध संस्थानों (आइआइएसईसार) को उसके दायरे में लाना है। ऐसा न हो पाने के वजह से इन संस्थानों से पास होकर निकलने वाले छात्रों को डिग्री नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (दाखिले में आरक्षण) संशोधन विधयक, आर्किटेक्ट संशोधन विधेयक, शिक्षा का अधिकार संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद संशोधन विधेयक भी संसद में अटके पड़े हैं।












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