दिल्ली से कार चुरा उत्तर-पूर्वी राज्यों में बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़

Arrested
दिल्ली (ब्यूरो)। रिटायर्ड सैनिक खड़क बहादुर राणा पहले नकली नोटों के धंधे में जुड़ा था। गिरफ्तार होने के बाद खड़क बहादुर वाहन चोर सरगना बन गया। खड़क बहादुर दिल्ली समेत एनसीआर से वाहन चोरी करवाकर पश्चिम बंगाल भेजता था।। खड़क बहादुर दस वर्षों में उत्तर-पूर्वी के राज्यों में 500 से ज्यादा वाहनों की तस्करी कर चुका है।

अपराध शाखा की टीम ने तीन महीने की मशक्कत के बाद गिरोह का पर्दाफाश कर जलपाईगुड़ी (पश्चिमी बंगाल) निवासी खड़क बहादुर को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया है। इसके बाद सराय ख्वाजा, फरीदाबाद निवासी मो. अरमान उर्फ इम्तियाज, उत्तम नगर (दिल्ली) निवासी शेखर, मेरठ निवासी मुजफ्फर और मुरादाबाद निवासी मोहम्मद अरकन को गिरफ्तार किया है।

इनके कब्जे से चोरी के 10 वाहन बरामद हुए हैं और चोरी की करीब 90 वारदातें कनेक्ट हो गई हैं। अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त प्रमोद कुशवाह ने बताया कि खड़क बहादुर भारत का अब तक चोरी के वाहनों का सबसे बड़ा रिसीवर है। इंस्पेक्टर भगवती प्रसाद और प्रवीण कुमार की टीम ने तीन महीने की मशक्कत के बाद खड़क बहादुर को गिरफ्तार किया है।

मो. अरकान एक बार में आधा दर्जन से ज्यादा वाहन चोरी कर पहुंचाता था और फिर विमान से वापस आता था। खड़क बहादुर दस साल से इस गोरखधंधे में लगा हुआ था। वह दिल्ली एनसीआर से ऑन डिमांड वाहन चोरी करवाता था। पहले यह चोरी के वाहन खुद लेता था। मगर कमाई होने के बाद इसने ड्राइवर के तौर पर आधा दर्जन से ज्यादा युवक रख लिए थे। ये ड्राइवर ही मोहम्मद अरकान से चोरी के गाड़ियों की लेते थे।

बदमाश इंश्योरेंस कंपनियों से टोटल कंडम हो चुकी गाड़ियों को कागजातों समेत खरीद लेते थे। चोरी की गाड़ी मेरठ में मुल्ला के पास पहुंचती थी और वह गाड़ी का पूरा लॉक सिस्टम बदल देता था। चोरी की गाड़ी पर टोटल कंडम हो चुकी गाड़ी की चेसिस और इंजन नंबर बदल देते थे। फिर गाड़ियों को उत्तर-पूर्वी के राज्यों में पहुंचा देते थे। मुजफ्फर गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर बदलने में माहिर है। शेखर चोरी की गाड़ियों को या तो उत्तर-पूर्वी राज्यों पहुंचवाता था या फिर स्थानीय डीलरों को बेच देता था। अरमान वाहन चुराने में माहिर है।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि मोहम्मद अरकान चोरी की वाहन लेता था। बदमाश चोरी के वाहनों के यूपी और हरियाणा के नकली रजिस्टे्रशन कागजात तैयार करते थे। इन कागजातों पर चोरी का वाहन किशनगंज (बिहार) पहुंचते थे। वहां वाहन को पहुंचाने से पहले इंजन और चेसिस नंबर राणा को एसएमएस कर दिए जाते थे।

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