साल 2012 में भी बाजार पर आशंकाएं बरकरार

वर्ष 2011 बीत चुका है, इस दौरान प्रत्येक दस सैकिंड में बाजार की पूंजी से 10 लाख डॉलर निकल गये। पिछले साल की समाप्ति पर सेंसेक्स 15,454.92 अंक पर बंद हुआ। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि बाजार सुधरेगा और भातीय शेयर बाजार का बैरोमीटर कहा जाने वाला सेंसेक्स 28,500 तक पहुंच सकता है पर कुछ को इसके ढह कर 8000 तक आ जाने की आशंका है।
हालांकि, सोने को लेकर सभी तेजी के मूड में हैं। उनका मानना है कि वर्ष 2011 में तेजी के कीर्तिमान बनाने के बाद 2012 में भी सोने चांदी में निवेश की धूम रह सकती है। वर्ष 2011 में जहां शेयर बाजार में सेंसेक्स 24.6 प्रतिशत गिरा है वहीं दूसरी तरफ सोना 32 प्रतिशत और चांदी का भाव 10 प्रतिशत उंचा रहा है।
सबसे बेहतर निवेश परिसंपत्ति का तमगा बरकरार रखते हुये 2011 में सोने का भाव 20,890 रुपये प्रति 10 ग्राम से शुरु होकर वर्ष की समाप्ति 27,640 रुपये प्रति 10 ग्राम पर की। चांदी भी इस दौरान 46,500 से बढकर 51,150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच र्गइ। सोने ने 30,000 रुपये तक की उंर्चाइ नापी जबकि चांदी वर्ष के दौरान 60,000 रुपये किलो तक पहुंच र्गइ थी।
इसके विपरीत शेयर बाजार में सेंसेक्स ने 20,000 अंकों से अपनी शुरुआत की और 15,454.92 अंक पर वर्ष की समाप्ति की। इसमें 5,054 अंक की गिरावट दर्ज की र्गइ। सूचीबद्ध कंपनियों की बाजार पूंजी 19.46 लाख करोड़ रुपये घटकर 53,48,644.80 करोड़ रुपये रह गया।












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