माया-मुलायम की जुगलबंदी और राज्यसभा में फंसेगा लोकपाल बिल!

लोकसभा में लोकपाल बिल पर सपा और बसपा ने वॉकआउट कर दिया। जिससे लोकपाल बिल लोकसभा में पास तो हो गया लेकिन इस बिल को संवैधानिक कानून बनाने की सरकार की मंशा पूरी नहीं हो सकी। अब सरकार लोकपाल बिल को लोकसभा से पास कराकर राज्य सभा में ले आई है। यह बिल राज्य सभा में पेश हो पाता है या नहीं यह भी मुलायम और मायावती की जुगलबंदी पर निर्भर करता है।
लोकपाल बिल को राज्य सभा में पास कराने के लिए सरकार को 122 सांसदों की मंजूरी चाहिए। इनमें से बसपा के 18 सांसद हैं तो सपा के 5 सांसद हैं। यह संख्या ही लोकपाल बिल की तकदीर तय करने में बड़ा रोल अदा कर सकती है। लोकसभा में यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन करने वाली सपा और बसपा ने लोकसभा में सरकार के खिलाफ वोटिंग नहीं की थी।
राज्यसभा में अगर सरकार लोकपाल बिल को पास कराना चाहती है तो उसे सपा और बसपा के समर्थन की जरूरत होगी। अगर सपा और बसपा लोकसभा की तरह राज्सभा से भी वॉकआउट कर जाते हैं तो सरकार का कुछ काम बन सकता है। इसके लिए सरकार को सभी घटक दलों का पूरा समर्थन चाहिए होगा। वहीं अगर सपा और बसपा लोकपाल बिल में सरकार के खिलाफ वोटिंग कर देती है तो इस बिल का लटकना तय माना जा रहा है।
संसद के शीतकालीन सत्र का आज तीसरा दिन है। राज्यसभा में लोकपाल बिल पर चर्चा करने के बाद इस पर वोटिंग होनी है। इस मामले पर अभी मुलायम सिंह ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। मायावती राज्यसभा में लोकपाल बिल पर किस करवट जाती हैं अभी इसके बारे में तय नहीं है। राज्य सभा में 243 सीटों पर होने वाली वोटिंग में सरकार बहुमत हासिल करती नहीं दिखाई दे रही है।
कांग्रेस की बात की जाए तो उसके पास राज्य सभा में 71 सांसद हैं। लोकपाल बिल पर घटक दलों को भी कई आपत्तियां हैं। फिर भी अगर सभी घटक दल कांग्रेंस के साथ आ जाते हैं तो भी सरकार बामुश्किल 100 का आंकड़ा पार करती हुई नजर आ रही है। अगर आंकड़ों की गणित पर गौर किया जाए तो पिक्चर यही क्लीयर हो रही है कि लोकपाल बिल राज्य सभा में पास हो पाएगा इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है।












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