कोर्ट में पेश होगी महावीर की प्रतिमा

अदालत ने प्राचीन श्री अग्रवाल दिगंबर जैन पंचायत के सचिव को आदेश दिया गया है कि मंदिर में स्थापित की गई भगवान महावीर की प्रतिमा को बतौर केस प्रापर्टी में अदालत में लाएं। दरअसल चोरी की प्रतिमा को सुपरदारी पर पूजा-अर्चना के लिए जैन समुदाय को सौंपा गया है। तीस हजारी अदालत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अपर्णा स्वामी ने आरोपियों के अधिवक्ता की अर्जी पर विचार करने के बाद सुपरदारी पर छोड़ी गई भगवान महावीर की प्रतिमा को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है।
तीनों आरोपियों के अधिवक्ता अमित कुमार की ओर से दलील दी गई थी कि चोरी की संपत्ति (भगवान महावीर की प्रतिमा) को अदालत में क्रॉस के दौरान पेश करना जरूरी है। अदालती प्रक्रिया और बचाव पक्ष की दलील को देखते हुए अदालत ने दिगंबर जैन मंदिर में नौ अप्रैल, 2007 को स्थापित की गई भगवान महावीर की प्रतिमा को जनवरी, 2012 में अदालत में पेश करने का आदेश दिया है।
दरअसल कश्मीरी गेट के नजदीक मोरी गेट के पास से पुलिस ने तीन मजदूरों को 21 फरवरी, 2007 को भगवान महावीर की प्रतिमा के साथ गिरफ्तार किया था। जैन समुदाय की भावनाओं का ख्याल रखते हुए पांच करोड़ की सुपरदारी पर प्रतिमा को जैन समुदाय को सौंप दिया गया था। भारतीय पुरातत्व विभाग ने प्रतिमा को पौराणिक और सौ वर्ष से अधिक पुराना बताया था।
प्रतिमा का आकार 19 गुणा 13.5 सेमी और वजन 4.2 किलोग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिमा की कीमत करोड़ों में आंकी गई थी। इसके बाद दिल्ली के प्राचीन श्री अग्रवाल दिगंबर जैन पंचायत की ओर से अदालत में एक अर्जी दी गई थी। जिसमें कहा गया था कि जैन समुदाय भगवान महावीर की पूजा करते हैं। चांदनी चौक स्थित अति प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में जैन समुदाय के लोग पूजा करते आते हैं। समुदाय की भावनाओं का ख्याल रखते हुए पांच करोड़ रुपये की सुपरदारी पर भगवान महावीर की प्रतिमा को जैन समुदाय को सौंप दिया गया था।












Click it and Unblock the Notifications