गिरफ्तारी से बच गए रिलायंस प्रमुख मुकेश अंबानी

कंपनी की तरफ से जुर्माने के तौर पर 25 हजार रुपए भरने के बाद याचिकाकर्ता की तरफ से मामला वापस ले लिया गया था। जिसके बाद 16 दिसंबर को उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट भी वापस ले लिया गया।
याचिकाकर्ता डॉ जोसफ मक्कोलिल ने 2003 में रिलायंस को मोबाइल रिलायंस इंफोकॉम खरीदा था। याचिकाकर्ता का कहना था कि कंपनी ने उन्हें फ्री में कॉल और मैसेज की सुविधा देने का वादा किया था। इस दौरान जब मोबाइल खराब हो गया तो डॉ जोसफ ने कंपनी पर मुकदमा कर दिया।
30 अक्टूबर 2010 को उपभोक्ता फोरम ने कंपनी को 24 हजार रुपए हर्जाने के रूप में और 12 प्रतिशत ब्याज के साथ उपभोक्ता को हर्जाना भरने के आदेश दिए। अदालत ने हर्जाना भरने के लिए कंपनी को 2 महीने का वक्त दिया था। साल भर बाद भी हर्जाना न मिलने के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
जिसके बाद अंबानी के खिलाफ वारंट जारी कर दिया। जिसके बाद कंपनी को हर्जाना भरना पड़ा। अदालत ने मुकेश अंबानी को अगले साल 15 फरवरी से पहले अदालत में पेश होने का आदेश भी दिया है।












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