इंडो-चाइना वार में नेहरू के इस्राइली मदद मांगने का कोई रिकार्ड नहीं

सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब से सहमति जताते हुए कहा कि चूंकि मांगी गयी सूचना उपलब्ध नहीं है , इसलिए उसे उपलब्ध नहीं करवाया जा सकता। अग्रवाल ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरटीआई दाखिल की थी। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 1962 के युद्ध के दौरान नेहरू ने इस्राइल का रूख किया था। अग्रवाल ने मंत्रालय से यह जानना चाहा था कि पत्र की विषय वस्तु क्या थी, गुरियन का जवाब क्या था और इसके अलावा दोनों देशों के बीच इस बारे में क्या आदान प्रदान हुआ था।
गांधी ने कहा, सूचना की प्रकृति को देखते हुए, आवेदनकर्ता एक ऐसे पत्र के बारे में सूचना मांग रहा है जो किसी देश को हो सकता है लिखा गया हो जिसके साथ भारत सरकार के राजनयिक संबंध नहीं थे। तो ऐसे में किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल है कि उसका कोई रिकार्ड था या नहीं। अग्रवाल ने यह भी जानना चाहा था कि क्या भारत ने इस्राइल से उन विमानों के जरिए हथियारों की आपूर्ति लेने में हिचक दिखायी थी जिन पर इस्राइली ध्वज लगा हो। उन्होंने कहा कि आरटीआई आवेदन पहले ही कई मंत्रालयों को भेजा जा चुका है और उन सभी का दावा है कि ऐसा कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।











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