अलगाववाद को परास्त करने के लिये सोनिया की पहल

कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र और राज्यों से इन मुद्दों पर गंभीरतापूर्वक ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्य सुनिश्चित करना उनकी बुनियादी और संवैधानिक जिम्मेदारी है। सोनिया ने कहा, केंद्र और राज्यों को आदिवासी क्षेत्रा में पूरी ताकत से पहले करने के अपने बुनियादी और संवैधानिक दायित्वों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं समझती हूं कि अगर हम ऐसा करेंगे तब हम उन लोगों को लोकतांत्रिक मुख्यधारा में वापस ला पायेंगे जिन्होंने हिंसा का रास्ता अख्तियार कर लिया है। उन्होंने कहा, हम यदि ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को लागू करें तो हम वामपंथी उग्रवाद को परास्त कर सकते हैं।
केंद्र और राज्य सरकारों को जनजातीय आबादी की पूरी गंभीरता से मदद करने में अपनी मौलिक और संवैधानिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को संप्रग सरकार के अच्छे कायो के बारे में जनता को जानकारी देनी चाहिए और उनके कल्याण के लिए सरकार की ओर से शुरू किये गए कार्यक्रम के बारे में शिक्षित करना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, आज प्रश्न केवल यह नहीं है कि सदियों पुरानी आदिवासी परंपरा को संरक्षण प्रदान करें बल्कि सवाल उन्हें विकास के लिए उचित अवसर प्रदान करने है। हमें आदिवासी युवाओं को शिक्षा, आधुनिक कौशल एवं आर्थिक विकास का मौदा देना चाहिए। सोनिया ने कहा कि आदिवासी देश के अनेका में एकता के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का आदिवासियों से लम्बा नाता रहा है जिसे और आगे बढ़ाये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में समृद्ध खनिज संपदा का दोहन इस प्रकार से किया जाना चाहिए कि उनकी जमीन और आजीविका पर कोई प्रभाव नहीं पड़े। केंद्र सरकार ऐसे कानून बनाने की प्रक्रिया में है ताकि खनिज संसाधन का फायदा आदिवासी लोगों को भी मिल सके। सोनिया ने आदिवासी महिलाओं के कल्याण की दिशा में दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योगदान और पंचायती राज व्यवस्था में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान को भी याद किया।












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