किसानों पर चर्चा के लिए नायडू चाहते हैं विशेष सत्र

संसद में गुरुवार को राज्यसभा में सरकार और विफक्ष के सभी सदस्यों ने एक स्वर से कहा कि किसान की आत्महत्याओं को रोकने का हल तलाशना जरूरी हो गया है। हालांकि यह काम दो चार घंटे में नहीं हो सकता इसलिए सात दिन का विशेष सत्र बुलाना चाहिए जिससे किसानों की आत्महत्याओं की वजह तलाशने के साथ ही इस समस्या से निपटने के उपाय निकाले जा सके।
राज्यसभा में कृषि क्षेत्र की स्थिति और किसानों की आत्महत्या विषय पर बृहस्पतिवार को अल्पकालिक चर्चा हुई। चर्चा की शुरुआत भाजपा के वेंकैया नायडू ने की। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल कृषि मंत्रालय नहीं कर सकता है, इसके लिए संबंधित अन्य मंत्रालयों को एकजुट होकर नीति बनानी होगी। कृषि उपज की लागत और बाजार मूल्य में बढ़ते अंतर से खेती घाटे में जा चुकी है। ऐसे में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं।
नायडू ने कहा कि बुंदेलखंड में 1500 किसान घाटे से ऊबकर जान दे चुके हैं। सरकार के आश्वासन देने के बाद भी पीडि़त परिवारों को राहत नहीं दी गई है। खाद, बीज, सिंचाई, बिजली, डीजल, मजदूरी और कीटनाशकों के महंगा होने से खेती की लागत बहुत अधिक बढ़ गई है। इसके मुकाबले फसलों की उपज के मूल्य कम हैं, जिससे खेती घाटे का सौदा हो गई है।
राज्यसभा में मनोनीत सदस्य व कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि खेती को राजनीतिक अथवा संकीर्ण नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि कृषि क्षेत्र के विभिन्न पक्षों पर चर्चा के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जाए। नगदी खेती वाले क्षेत्रों में आत्महत्याएं ज्यादा हो रही हैं।
हालांकि इसमें कमी आई है, लेकिन किसानों को अभी भी कृषि ऋण के लिए सूदखोरों के यहां भटकना पड़ता है। जदयू के शिवानंद तिवारी कृषि मंत्री शरद पवार पर जमकर बरसे। उन्हें नकारा कृषि मंत्री तक कहते हुए पद छोड़ने की सलाह दे डाली। अब देखना है कि सरकार किसानों के लिए विशेष सत्र बुलाती है या फिर उनको आत्महत्या करने के लिए छोड़ देगी।












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