देश में एक करोड़ बीस लाख बच्चियों की हुई भ्रूण हत्या

इसकी पुष्टि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समिति की अक्टूबर 2010 की रिपोर्ट में भी हुई है। भारत में वर्ष 2011 की जनगणना से संकेत मिलता है कि छह साल तक के बच्चों के अनुपात में लड़कियों की संख्या में लगातार कमीं आ रही है। बावजूद इसके शासन प्रशासन इस कमीं को दूर नहीं कर पा रहा है। प्रति एक हजार लड़कों में लड़कियों की संख्या 914 रह गयी है। सरकार के सामने समस्या यह है कि जो कमीं आ चुकी है उसे किस प्रकार पूरा किया जा सकेगा। सर्वेक्षण के मुताबिक देश के कई बड़े राज्यों महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा व मध्यप्रदेश आदि राज्यों में यह प्रतिशत 914 से भी कम है।
पंजाब और हरियाणा में तो यह आंकड़ा क्रमश : 846 और 830 है। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समिति का दावा है कि एशियाई देशों खासकर भारत और चीन में 11 करोड़ 70 लाख कन्याओं की भ्रूण हत्या की गयी। कन्या भ्रूण हत्या बाल अधिकार के लिये काम करने वाली संस्थाओं के लिये चिंता का विषय बना है लेकिन जब तक सरकारें इस ओर सख्ती से कदम नहीं उठाएंगी तब तक यह तस्वीर बदल नहीं सकेगी।
आज भी कई ऐसे इलाके व जातियां हैं जहां लड़की के जन्म पर लोग अफसोस करते हैं। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि लड़कियों के अधिकार को बढ़ावा देने के लिये स्वयं सेवी संस्था प्लान इण्डिया ने लडकियों को जन्म लेने दीजिये योजना शुरू की है। संस्था कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चला लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि लिंग अनुपात में सुधार हो लेकिन हकीकत में अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। पिछले वर्ष छह राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में लड़कियों को जन्म लेने दीजिये योजना शुरू की गयी है।












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