सीबीएसई बोर्ड के हर स्कूल की होगी अपनी वेबसाइट

सीबीएसई का मानना है कि कम्यूनिकेशन स्किल के विकास से न केवल छात्रों को जिंदगी में चुनौतियों से लड़ने में मदद मिलेगी, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी पैदा होगा। अंग्रेजी कोर का पाठ्यक्रम पांच वर्ष पुराना है उसके आधार पर छात्रों के प्रदर्शन से मिल रहे फीडबैक से बोर्ड संतुष्ट नहीं है। लिहाजा, पाठ्यक्रम में ऐसा कुछ जोड़ने पर विचार हो रहा है जिससे उनकी अभिव्यक्ति को नई दिशा मिल सके। पाठ्यक्रम में जोड़ने के लिए बोर्ड ने बच्चों व शिक्षकों के लिए प्रश्न निर्धारित कर उन प्रश्नों के आधार पर सुझाव मांगे हैं। देशभर से प्रश्नावली के जरिए उनका पक्ष लेने की कोशिश की जा रही है। इन सभी से प्राप्त फीडबैक के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि पाठ्यक्रम में क्या बदलाव किया जाए।
बच्चों से पूछा गया है कि वे पुस्तक के टॉपिक से संतुष्ट हैं, क्या उन्हें लगता है कि बदलाव की जरूरत है, क्या नया जोड़ा जा सकता है और कौन सा चैप्टर रुचिकर है। जबकि शिक्षकों से पूछा गया है कि वे क्या यह सोचते हैं कि इसमें पढ़ाए जा रहे पाठ 12वीं में पढ़ाने योग्य हैं, क्या पाठ के आखिर में दी गई एक्सरसाइज भाषा के उद्देश्य को पूर्ण कर रही है। साथ ही सीबीएसई बोर्ड ने हिंदी में जवाब देने की छूट देने की शुरुआत की है। दसवीं और 12वीं परीक्षाओं में उत्तर अंग्रेजी में ही देने होते हैं। सीबीएसई बोर्ड ने बदलाव किया है। इस सत्र से छात्रों को अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी उत्तर देने की छूट मिल गई है। यह व्यवस्था हॉस्पिटेलिटी और टूरिज्म कोर्स के लिए ही है। यह दोनों नए विषय पिछले सत्र से ही सीबीएसई के साथ जुड़े हैं। उम्मीद है जल्द ही बाकी में भी इस
तरह का बदलाव किया जाएगा।












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