जानिए भदोही का राजनैतिक इतिहास

Bhadohi
भदोही। कालीनों के शहर के नाम से विख्यात भदोही को लोग आज संत रविदास नगर कहते है। वाराणसी और प्रतापगढ़ के बीच में बसा यह शहर पूरे एशिया में कालीनों के लिए जाना जाता है। इलाहाबाद, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर की सीमाओं को स्‍पर्श करते हुए इस जिले में ज्ञानपुर, औराई, भदोही में तीन तहसील मुख्‍यालय है। जिनके अधीन डीघ, अमोली, सुरियावां, ज्ञानपुर औराई और भदोही विकास खण्‍ड कर्यालय है। मिर्जापुर के साथ मिलकर संसदीय क्षेत्र बनाने वाले इस जनपद मे 3 विधान सभा क्षेत्र ज्ञानपुर, औराई और भदोही हैं।

इस जनपद का मुख्‍य व्‍यवसाय तो कालीन ही है। कालीन उद्योग का इतिहास लगभग 5000 वर्ष पुराना है। पहला कालीन लगभग 3000 ई. पूर्व‍ मिश्र वासियों ने बनाया था। मिश्रवासी बुनाई कला के अच्‍छे ज्ञाता थे। वहीं से यह कला फारस पहुंची लेकिन अरब संस्‍कृति की वजह से इसका विकास बाधित हो गया।

बताया जाता है कि ईस्‍ट इण्डिया कम्‍पनी के व्‍यापारी इस कालीन निर्माण की कला से बहुत प्रभावित थे उन्‍होने अन्‍य हस्‍तशिल्‍पों का विनाश करना अपना दायित्‍व समझा था लेकिन कालीन की गुणवत्‍ता और इसके यूरोपीय बाजार मूल्‍य को देखकर इस हस्‍तशिल्‍प पर हाथ नहीं लगाया। लेकिन अंग्रेजो के विनाश से बचने वाला यह उद्योग राजनैतिक उपेक्षा और सरकारी तंत्रो की मार सह रह है।

यहां के कारीगरों के लिए किसी भी सरकार ने कुछ नहीं किया है। राजनैतिक पार्टियों ने भदोही का नाम तो बदला लेकिन इस जिले के सुधार के लिए कुछ नहीं किया। बिजली, पानी, सड़कों के लिए तरस रहे इस शहर में राहुल गांधी ने आकर इस बार बहुत बड़े-बड़े वादे किये हैं। यहीं आकर उन्होंने मुसलमानों के आरक्षण की बात याद आयी है देखना दिलचस्प होगा कि उनके यह वादे आने वाले चुनावों में क्या गुल खिलाते हैं?

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