सरकार ने लोकपाल को मजाक बना डाला: अरुणा रॉय

इसके बाद अरुणा रॉय ने कहा- राजनीतिक कानूनविदों को आखिर जन लोकपाल क्यों मंजूर नहीं है। हमें तो साफ लगता है कि यह जनता के साथ धोखाधड़ी ही है। जनता के साथ जुड़े हुए कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे से अलग रखना, मजाक ही है। जिनसे भ्रष्टाचार का सबसे पहला पाला पड़ता है। जनता जिनसे रोज भिड़ रही है उसे लोकपाल के दायरे में नहीं लाने का मतलब सीधा यही है कि सरकार जनता की बात मानना नहीं चाहती।
अब तो स्थाई समिति भी मजाक बनकर रह गई है। आज भी लोकपाल बिल को खारिज करने का सवाल कोई बड़ा नहीं, लेकिन हम यह मानते हैं कि संसद और जनता के बीच में जो रिश्ता है, उसे बनाये रखना जरूरी है। स्थाई समिति जिस तरह से संसद में बहुमत से पारित बातों को भी दरकिनार करने में लगी हुई है, यह बहुत बड़ा धोखा है। ये भ्रष्टाचार के माध्यम से देश को बर्बाद करना चाहते हैं।
सरकार का लोकपाल बिल महज पुराना जहर नई बोतल में लेकर आयी है। ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को लाने की लड़ाई में हम पीछे नहीं हटेंगे।












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