बिहार में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय, वे भी चार कमरों का

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रशांत कुमार शाही ने कहा कि केंद्र ने जमीन के चयन के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है। केंद्र सरकार पहले स्थल चयन कर अंतिम निर्णय करे, तभी राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में कोई कार्रवाई करेगी। शाही ने कहा कि भारत सरकार ने पहले मोतिहारी में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी थी।
जिसके बाद निर्णय बदल गया और पटना में इस विश्वविद्यालय की स्थापना का बिहार से अनुरोध किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोतिहारी में ही केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पत्र लिखा है। केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए मंज़ूरी मिले तक़रीबन दो साल हो गए हैं लेकिन उसके स्थान निर्धारण को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच जारी वाद-विवाद के कारण मामला अटका है।
विश्वविद्यालय अपना स्थान ही तलाश रहा है और राज्य सरकार कहती है कि अगर विश्वविद्यालय को बिहार में स्थापित होना है तो गाँधी के चंपारण आन्दोलन से जुड़े एक छोटे शहर मोतिहारी में जाना ही होगा। इसको नीतीश कुमार की जिद बताया जा रहा है। उनका कहना है कि मोतिहारी में अच्छे कैम्पस के लायक ज़मीन उपलब्ध है और गांधी की कर्मभूमि के रूप में चर्चित उस जगह पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय खुलने से राज्य के उस हिस्से में भी मानव संसाधन विकास के साथ-साथ तरक्क़ी के और कई रास्ते खुल सकेंगे।












Click it and Unblock the Notifications